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कांग्रेस को बड़ा झटका, एक और एमएलए की जा सकती है विधायकी, हाईकोर्ट का कड़ा रुख

MLA Abhay Mishra- हाईकोर्ट ने कहा कि आरोप सही पाने पर विजयी उम्मीदवार का चुनाव निरस्त किया जा सकता है।

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Congress MLA Abhay Mishra to face trial in the High Court

Congress MLA Abhay Mishra to face trial in the High Court

MLA Abhay Mishra- एमपी कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है। उसके एक और एमएलए की विधायकी पर संकट खड़ा हो गया है। कांग्रेस विधायक अभय मिश्रा के खिलाफ हाईकोर्ट में ट्रायल चलेगा। कोर्ट ने उनके खिलाफ दायर चुनाव याचिका खारिज करने से इनकार कर दिया है। कोर्ट का साफ कहना है कि याचिका में उठाए गए आरोपों को ट्रायल के दौरान ही तथ्यों व साक्ष्यों पर परखा जा सकता है। हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि आरोप सही पाने पर विजयी उम्मीदवार का चुनाव निरस्त किया जा सकता है। चुनाव याचिका में सेमरिया से विधायक अभय मिश्रा के निर्वाचन को चुनौती दी गई है। विधानसभा में भाजपा के पराजित उम्मीदवार केपी त्रिपाठी ने यह याचिका दायर की है।

मप्र की जबलपुर हाईकोर्ट ने रीवा जिले के सेमरिया से कांग्रेस विधायक अभय मिश्रा के खिलाफ दायर चुनाव याचिका खारिज
करने से स्पष्ट इनकार कर दिया है। जस्टिस विनय सराफ की सिंगल बेंच ने कहा कि याचिका में लगाए गए आरोपों को ट्रायल के दौरान ही तथ्यों व साक्ष्यों पर परखा जा सकता है।

सेमरिया सीट पर 2023 में हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा के पराजित उम्मीदवार केपी त्रिपाठी ने निर्वाचित कांग्रेस विधायक अभय मिश्रा के निर्वाचन को चुनौती देते हुए याचिका दायर की है। कांग्रेस विधायक ने चुनाव याचिका खारिज किए जाने की मांग करते हुए हाईकोर्ट में आवेदन दायर किया था।

याचिकाकर्ता का आरोप है कि निर्वाचित विधायक के खिलाफ अपराधिक प्रकरण दर्ज है। उन्होंने अपने हलफनामे में अपराध दर्ज होने की जानकारी नहीं दी है। याचिकाकर्ता ने सूचना के अधिकार से प्राप्त जानकारी प्रस्तुत की थी।

आरोप सही पाए जाने पर चुनाव हो सकता है निरस्त

याचिकाकर्ता की तरफ से आरोप लगाया गया है कि निर्वाचित विधायक ने हलफनामा में आर्थिक जानकारी छिपाई है। उनके नाम पर एचडीएफसी बैंक में 50.87 लाख रुपए का लोन बकाया है। सुनवाई के बाद कोर्ट ने कहा कि याचिका मेें नामांकन पत्र के साथ दायर हलफनामा में जरूरी जानकारी छिपाने के बारे में खास बातें कही हैं। याचिका में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं, तो विजयी उम्मीदवार का चुनाव निरस्त किया जा सकता है। ट्रायल के दौरान साक्ष्यों व तथ्यों का परीक्षण किए बिना इन आरोपों को खारिज नहीं किया जा सकता।