
निर्माणाधीन रांझी तहसील कार्यालय
जबलपुर. एसडीएम और तहसीलदारों के साथ ही स्टाफ के लिए स्थान की कमी जल्द दूर होगी। जिले में तीन नई तहसीलों में दो के भवनों का निर्माण शुरू हो गया है। मल्टी स्टोरी बिल्डिंग में तमाम प्रकार की सुविधाएं होंगी। रांझी तहसील कार्यालय का भवन सिविल अस्पताल रांझी के पास तो गोरखपुर तहसील भवन शक्तिभवन के प्रवेशद्वार के समीप तैयार किया जा रहा है।
जिले में अधारताल, गोरखपुर और रांझी में संयुक्त तहसील कार्यालय के निर्माण की स्वीकृति मिली है। प्रत्येक तहसील के लिए 6 करोड़ 40 लाख रुपए की राशि स्वीकृत की गई है। पहले तो तहसील भवनों के लिए जगह की तलाश की गई। अब अधारताल तहसील को छोड़कर बांकी जगहों पर भूमि का चयन हो गया हैै। इसलिए वहां पर निर्माण शुरू हो गया है। इसी प्रकार कुछ उप तहसीलों के भवनों की शासन की तरफ से स्वीकृति मिल गई है। इन जगहों पर भी भवन बनना प्रारंभ हो गया है।
सभी तरह की होंगी सुविधाएं
शहर में नवगठित तीनों नई तहसीलों के पास अपना भवन नहीं था। उन्हें कलेक्टर कार्यालय से उनके क्षेत्र में स्थानांतरित कर दिया था। मगर सभी किराए के भवनों में चल रहे हैं। एसडीएम और तहसीलदार छोटे-छोटे कमरों में बैठकर काम करते हैं। स्टाफ के लिए तो स्थान का बड़ा अभाव है। अब खुद का भवन तैयार किया जा रहा है। रांझी में सिविल अस्पताल के पास भवन का निर्माण किया जा रहा है। अभी भवन के कॉलम बनाए जा रहे हैं। अगले एक साल के भीतर भूतल सहित तीन मंजिला इमारत तैयार की जानी है। ऐसी ही बिल्डिंग रामपुर शक्तिभवन मुख्य प्रवेशद्वार के बगल में पड़ी जमीन पर बन रही है।
इन जगहों पर चल रहे कार्यालय
वर्तमान में अधारताल तहसील हाट बाजार में चल रही है। तहसीलदार कहीं तो एसडीएम का कमरा दूसरे भवन में हैं। ऐसे में कोई व्यक्ति अपने काम से आता है तो उसे परेशानियां उठानी पड़ती हैं। रांझी तहसील कार्यालय जबलपुर इंजीनियरिंग कॉलेज हॉस्टल परिसर में बने गोदाम में चल रही है। यहां अभी तक एसडीएम बैठते ही नहीं है। कमरों के अभाव में उन्हें अभी तक कलेक्ट्रेट बिल्डिंग से काम करना पड़ रहा है। यदि किसी व्यक्ति को तहसीलदार के बाद एसडीएम से काम हो तो सात किलो मीटर दूर जाकर उसे पूरा कराना पड़ता है। वहीं गोरखपुर तहसील कार्यालय भी तरंग ऑडिटोरियम रामपुर में चलता है। यह भी कर्मचारी आवास में चल रहा है। इसमें पर्याप्त जगह नहीं है।
तहसील भवन का निर्माण प्रारंभ कर दिया गया है। इसके लिए शासन से स्वीकृति पहले मिल गई थी। भूमि का चयन नहीं होने के कारण काम रुका था। अब सारी प्रक्रियाएं पूरी हो गई हैं।
राजेंद्र शुक्ला, नायब तहसीलदार, गोरखपुर
Published on:
20 Feb 2023 12:16 pm
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