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लाेक स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग के सचिव को अवमानना नोटिस

एएनएम की नियुक्ति से जुड़ा मामला  

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rajasthan high court: अधिकारी के एकल हस्ताक्षर से पट्टा जारी करने के आदेश पर रोक

rajasthan high court: अधिकारी के एकल हस्ताक्षर से पट्टा जारी करने के आदेश पर रोक

जबलपुर . मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने आदेश नहीं मानने पर सख्ती बरती है। हाईकोर्ट के न्यायाधीश मनिंदर सिंह भट्टी की एकलपीठ ने लाेक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के सचिव मोहम्मद सुलेमान को अवमानना नोटिस जारी कर जवाब-तलब कर लिया। इसके लिए छह सप्ताह का समय दिया गया है।अवमानना याचिकाकर्ता आभा पांडे की ओर से कहा गया कि उन्होंने पूर्व में हाई कोर्ट में याचिका दायर कर मांग की थी कि जिन आशा कार्यकर्ताओं ने अशासकीय संस्थाओं से एएनएम का प्रशिक्षण प्राप्त किया है, उन्हें भी सीधे एएनएम के पद पर चयनित किया जाए। यह मांग मंजूर कर हाई कोर्ट ने याचिका का इस निर्देश के साथ निराकरण कर दिया था कि 60 दिन के भीतर याचिकाकर्ता को एएनएम के पद पर नियुक्त किया जाए। लेकिन आदेश का पालन नहीं किया गया। इस वजह से अवमानना याचिका दायर की गई।

उच्च स्तरीय जांच समिति की रिपोर्ट याचिका के साथ संलग्न करें

एक अन्य मामले में हाईकोर्ट ने आजीविका मिशन में हुए भ्रष्टाचार से जुड़ी उच्च स्तरीय जांच समिति की रिपोर्ट याचिका के साथ संलग्न करने के याचिकाकर्ता को निर्देश दिए हैं। न्यायाधीश शील नागू व न्यायाधीश वीरेंद्र सिंह की खंडपीठ ने मामले पर अगली सुनवाई 16 जनवरी तय की है।भोपाल निवासी भूपेंद्र कुमार प्रजापति की ओर से दायर जनहित याचिका में कहा गया कि इस मिशन के तहत सैकड़ों अवैध नियुक्तयां की गईं। सूक्ष्म बीमा योजना के तहत 29 जिलों में सेल्फ हेल्प ग्रुप से एक करोड़ 78 लाख रुपए वसूल किए, लेकिन उक्त राशि बीमा कंपनी में जमा नहीं की गई। सोमवार को सुनवाई के दौरान उन्होंने दलील रखी कि प्रदेश की एक वरिष्ठ आइएएस दिव्या मराव्या ने एक वर्ष पहले शिकायतों की जांच कर आजीविका मिशन के अधिकारियों एवं नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ रूरल डेवलपमेंट के अधिकारी के विरुद्ध भादंवि की धारा 420,467,468,120बी सहित अन्य आपराधिक धाराओं के तहत प्रकरण पंजीवद्ध करने के लिए शासन को अनुशंसा की थी। इसी के साथ इस मुद्दे पर विधानसभा में मैहर विधायक नारायण प्रसाद त्रिपाठी ने प्रश्न उठाया था। पंचयात मंत्रालय के पूर्व कैबिनेट मंत्री कमलेश्वर ने विधानसभा में ध्यानाकर्षण भी कराया था। इसके बावजूद कार्रवाई नहीं हो सकी। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर ने पक्ष रखा।