Corona experts warning: दशहरा-दीपावली पर आतिशबाजी से बढ़ेग संक्रमण

-Corona experts warning: बारूद के धुएं से विस्फोटक रूप ले सकती है महामारी
- हर हाल में पटाखों से करना होगा परहेज

 

By: Ajay Chaturvedi

Published: 14 Oct 2020, 03:35 PM IST

जबलपुर. फिलहाल कोरोना संक्रमण की रफ्तार धीमी जरूर नजर आ रही है पर अभी कोरोना का खतरा टला नहीं है। ऐसे में एहतियात बरतना जरूरी है। Corona experts warning है कि आबो हवा को दुरुस्त रखना ही होगा अन्यथा प्रदूषण वो भी वायु प्रदूषण से कोरोना महामारी विस्फोटक रूप ले सकती है। ऐसे में विशेषज्ञों की राय में दशहरा और दीपावली पर पटाखों से परहेज रखना ही होगा।

कोरोना के इलाज में लगे चिकित्सकों और विशेषज्ञों का कहना है कि, अध्ययन से यह स्पष्ट हो चुका है कि प्रदूषण से कोरोना का खतरा बढ़ता है। प्रदूषण वाले क्षेत्रों में कोरोना से ज्यादा मौतें सामने आई हैं। पटाखों के विस्फोट से होने वाला प्रदूषण खासकर सांस के मरीजों के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है। इससे सीओपीडी व अस्थमा के मरीज बढ़ सकते हैं। ऐसे में चिकित्सों की राय है कि, बेहतर होगा कि इस बार दीपावली पर पटाखे न जलाए जाएं। चिकित्सक बताते हैं कि कोरोना से स्वस्थ होने वाले कई मरीजों में अस्पताल से लौटने के एक माह बाद भी फेफड़ों का संक्रमण सामने आ चुका है।

स्कूल ऑफ एक्सीलेंस इन पल्मोनरी मेडिसिन मेडिकल कॉलेज अस्पताल के डायरेक्टर डॉ. जितेंद्र भार्गव का कहना है कि दीपावली व अन्य पर्व या दिवस पर फोड़े जाने वाले पटाखों से वातावरण खतरे में पड़ेगा। हवा में फैलने वाले बारूद के विषाक्त कण कोरोना संक्रमण का खतरा बढ़ा सकते हैं। वायु प्रदूषण सांस की तकलीफ बढ़ाएगा। कोरोना के कई मरीज ऐसे सामने आए हैं जिनमें अस्पताल से छुट्टी मिलने के एक माह बाद भी फेफड़ों में संक्रमण पाया गया। ऐसे में वायु प्रदूषण जितना बढ़ेगा उतना ही घातक होगा। ऐसे में कोरोना संक्रमण से गुजर कर उसे मात देने वालों के फिर से उसकी चपेट में आने का खतरा है। विशेषज्ञ कहते हैं ऐसे में इस बार यह संकल्प लेना होगा कि दशहरा और दीपावली पर आतिशबाजी बिल्कुल न करें। मास्क और शारीरिक दूरी के नियमों का अनिवार्य रूप से पालन करते रहें।

वैसे इस दिशा में राजस्थान सरकार ने पहल की है। सरकार ने पटाखा जलाने और उसकी बिक्री भी प्रतिबंधित कर दी है। उसी तर्ज पर मध्य प्रदेश सहित अन्य राज्यों को भी पहल करनी चाहिए। पहल तो यहां तक होनी चाहिए कि केवल दशहरा और दीपावली ही नहीं बल्कि किसी भी तरह से खुशी का इजहार आतिशबाजी से कतई न किया जाए। साथ ही खेतों में जलने वाली पराली भी कोरोना के लिहाज से घातक होगी।

विशेषज्ञ बताते हैं कि धुआं कैसा भी हो वह कोरोना का संक्रमण बढ़ाने वाला होगा। ऐसे में सबसे जरूरी ये है कि वातावरण को शुद्ध रखा जाए। शोध बताते हैं कि जहां प्रदूषण ज्यादा है वहां कोरोना का संक्रमण भी ज्यादा है और मृत्यु दर भी।

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