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यहां के लोगों की लापरवाही के पिटारे से निकल रहा कोरोना का जखीरा

जबलपुर में फिर बढ़ा खतरा, कम नमूनों की जांच के बावजूद नए मरीज मिलने की दर दोगुनी हुई    

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coronavirus case

कोरोना संक्रमित 1,80,304 मरीज अस्पताल में इलाज करा रहे है।

जबलपुर। कोरोना फिर सिर उठा रहा है। शहर में संक्रमण से बचाव में लापरवाही शुरू होते ही कोरोना के नए मरीज बढऩे लगे हैं। पिछले माह के मुकाबले इस माह में कोरोना के नए मरीज मिलने की दर लगभग दोगुनी हो गई है। यह दर अब प्रतिदिन बढ़ रही है। जिले में फरवरी में कोरोना के कुल 382 नए मरीज मिले थे। मार्च के 12 दिन में ही 318 नए संक्रमित मिल चुके हैं। यह स्थिति शहर में संक्रमण की नई लहर की ओर संकेत दे रहा है। लापरवाही बंद नहीं हुई तो शहर एक बार फिर कोरोना की गम्भीर चपेट में आ सकता है। इस बीच विक्टोरिया अस्पताल के कोविड वार्ड को फिर से संक्रमितों के लिए तैयार किया रहा है।
यह है स्थिति
मार्च : नए पॉजिटिव : डिस्चार्ज
01- 18 -12
02- 16 - 10
03- 27 - 17
04- 21 - 20
05- 28 - 22
06- 14 - 17
07- 24 - 16
08- 28 - 20
09 - 30 - 25
10 - 39 - 16
11 - 26 - 17
12-47-25

ये हैं संकट के संकेत
-फरवरी में प्रतिदिन लगभग एक हजार नमूने की जांच में 13-14 की औसत से नए मरीज मिले थे।
-अब प्रतिदिन संदिग्ध के नमूने की जांच कम हो गई। 24-25 की औसत से नए मरीज मिल रहे हैं।
-फरवरी में प्रतिदिन मिलने वाले नए मरीजों के अपेक्षाकृत स्वस्थ्य होने वाले मरीजों की संख्या ज्यादा थी।
-मार्च माह में 12 दिन में सिर्फ एक दिन नए मरीज से ज्यादा स्वस्थ्य होकर मरीज डिस्चार्ज हुए।
-फरवरी में कोरोना के एक्टिव केस की संख्या 100-120 के बीच पहुंच गई थी।
- अब कोरोना के एक्टिव केस बढऩे लगे है। इसकी संख्या 200 के करीब पहुंच रही है।
-मार्च शुरू होने के बाद से स्वस्थ्य होने वाले मरीज से ज्यादा प्रतिदिन नए संक्रमित मिल रहे हैं।
प्रशासन की ढिलाई पड़ रही भारी
कोरोना टीकाकरण की शुरुआत के साथ संक्रमण के रोकथाम को लेकर प्रशासन की कार्रवाई ढीली पड़ गई है। इससे आम लोग भी लापरवाही पर उतारू हो गए हैं। यह नियंत्रण में आए कोरोना के फिर से हावी होने में मददगार साबित हो रहा है। सड़कों पर उमड़ती भीड़ के बीच सोशल डिस्टेंसिंग गायब हो गई है। लोग बिना मास्क के घरों से बाहर निकल रहे हैं। सार्वजनिक स्थानों और बाजारों में सेनेटाइजेशन की व्यवस्थाएं अब नदारद है। पुलिस और प्रशासन की बिना मास्क घूमने वालों और कोरोना प्रोटोकॉल तोडऩे वाले कारोबारियों पर कार्रवाई बंद होने से भी मनमानी बढ़ गई है। इसे कोरोना के नए मरीज बढऩे का एक बड़ा कारण माना जा रहा है।
नागपुर, इंदौर के हालत देखकर सम्भलने की जरूरत
कोरोना काल में बुरे दौर से गुजरे नागपुर और इंदौर में हालात फिर बिगड़ रहे हैं। संक्रमण के बढ़ते मामलों पर नियंत्रण के लिए नागपुर में लॉकडाउन की तैयारी हो गई है। इन दोनों जगह के साथ शहर का निरंतर जुड़ाव है। दोनों शहरों में संक्रमण के फिर से फैलने में प्रमुख कारण मास्क लगाने और सोशल डिस्टेसिंग में लापरवाही मानी जा रही है। इन शहरों की स्थिति से सबक नहीं लेने पर यहां भी स्थिति अनियंत्रित हो सकती है।
ये करने की जरूरत
- घर से बाहर निकलने पर मास्क लगाएं। वापस लौटने पर अच्छे से सेनेटाइज हो।
- भीड़-भाड़ में जाने से बचें। बच्चे और बूढें घर से बाहर कम से कम निकलें।
- फीवर क्लीनिकों में संदिग्ध के जांच की व्यवस्था को फिर से मजबूत बनाया जाएं।
- मास्क नहीं लगाने वालों पर कार्रवाई के लिए पुलिस पहले की तरह सक्रिय हो।
- दुकान में मास्क नहीं लगाने और लगवाने वालों पर जुर्माना की कार्रवाई की जाए।
- हर संस्था और संस्थान का मुखिया मास्क-दो गज की दूरी की पालना कराएं।
- संदिग्ध लक्षण प्रतीत हो रहे हैं तो जांच ना करा लेने तक संबंधित क्वारंटीन रहें।