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कोरोना से जंग के कर्मवीर: व्हाट्सएप ग्रुप की अनोखी समाजसेवा, लॉक डाउन में सैकड़ों लोगों को खिला रहा खाना: देखें वीडियो

व्हाट्सएप ग्रुप की अनोखी समाजसेवा, लॉक डाउन में सैकड़ों लोगों को खिला रहा खाना: देखें वीडियो

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व्हाट्सएप ग्रुप की अनोखी समाजसेवा, लॉक डाउन में सैकड़ों लोगों को खिला रहा खाना: देखें वीडियो

जबलपुर। वैसे तो व्हाट्सएप का नाम आते ही हंसी मजाक और दोस्तों से गपशप की चर्चा या वायरल मैसेज पर बात होने लगती है। लेकिन कभी आपने सुना है कि व्हाट्सएप पर कोई ग्रुप सामाजिक सरोकारों और सुख दुख का साथी भी बन सकता है। जी हां हम बात कर रहे हैं जबलपुर के ऐसे ही व्हाट्सएप ग्रुप सुख-दुख परिवार की। इसे 4 साल बने हो गया है। इसमें करीब ढाई सौ से ज्यादा सदस्य सक्रिय हैं किंतु इसमें हास परिहास या गुड मॉर्निंग गुड नाइट के मैसेज नहीं आते बल्कि एक दूसरे के सुख और दुख की बातें सहयोग समर्पण और त्याग की चर्चा होती है।

जी हां सुख-दुख परिवार 4 साल पहले इस ग्रुप को पवन तिवारी द्वारा बनाया गया ।इसमें धीरे-धीरे हर वर्ग के हर परिवार के लोग जुड़ते चले गए। सभी के जन्मोत्सव परिवार के किसी के बिछड़ने के अवसर पर इन्होंने पौधारोपण और पौधे वितरण का कार्यक्रम शुरू किया। जन्मदिन पर पौधे देकर जन्म उत्सव मनाना और किसी के शोक में जाने पर उसकी याद में पौधे लगाना। कुल मिलाकर पर्यावरण संरक्षण की बात धीरे-धीरे और सामाजिक सरोकारों से लेकर सहयोग तक की बात होने लगी।

वर्तमान में कोरोना से जंग के कर्मवीर में के रूप में ये परिवार सामने आया है। 10 दिन पहले ग्रुप संचालक पवन तिवारी ने एक मैसेज डाला क्या हम कोरोना से प्रभावित लोगों की मदद कर सकते हैं। फिर क्या था लग गई सहयोगियों की भीड़ और महज 24 घंटे में सवा लाख रूपये से ज्यादा एकत्रित हो गया साथ में सहयोग करने वाले भी तैयार निशुल्क हो गए। किसी ने गैस चूल्हा दे दिया किसी ने लेबर की पेमेंट कर दी और किसी ने जगह स्थान दे दिया। कोई अनाज देने पहुंच गया तो किसी ने भोजन वितरण की व्यवस्था संभाली। शुरुआत की बात 100 लोगों को सुबह शाम का भोजन उपलब्ध कराएंगे। जो मजदूर गरीब हैं लेकिन पहले ही दिन है बात खत्म हो गई और 175 लोग के भोजन की व्यवस्था हो गई।

वर्तमान में करीब 400 लोगों कोरोना खत्म होने तक सुबह-शाम भोजन प्रदान किया जा रहा है। महिलाएं बच्चे सभी शामिल हैं जो अपने अपने स्तर पर सहयोग कर रहे हैं। भोजन पाने वालों को पहले चिन्हित किया गया जो जिस क्षेत्र में रहते हैं उनके क्षेत्रों के लोगों से पूछा गया कि जो जरूरतमंद है गरीब हैं या लेबर है कोई काम से रुक गई है। सरकारी मापदंडों के अनुसार भोजन तैयार होता है और वितरण भी उसी तरह से किया जाता है।