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निगम का रोज 20 ‘आवारा’ पकड़ने का दावा फेल

आवारा श्वानों की दहशत : सौ से ज्यादा लोग रोजाना हो रहे शिकार

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Corporation's claim of catching 20 'vagrants' every day failed

शहर की सडक़ों को आवारा घूमने वाले खूंखार रोज करीब सौ लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं।

जबलपुर. शहर की सडक़ों को आवारा घूमने वाले खूंखार रोज करीब सौ लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं। इससे विक्टोरिया, मेडिकल सहित निजी अस्पतालों में रैबीज का इंजेक्शन लगवाने के लिए सौ से अधिक लोग पहुंच रहे हैं। उधर, नगर निगम का दावा है कि वे रोजाना करीब 20 डॉग पकड़ रहे हैं लेकिन स्थिति यह है कि इन खूंखारों की संख्या बढ़ती जा रही है, जिससे निगम दावा फेल हो रहा है। डॉग होम्स में नसबंदी के बाद उन्हें केन्द्र से बाहर निकाल दिया जाता है, जिससे वे बीमारी की स्थिति में खूंखार होते जा रहा है।

शहर में कुत्तों के हमले से घायल होकर अधिकतर लोग एंटी रैबीज का इंजेक्शन लगवाने के लिए जिला अस्पताल (विक्टोरिया), मेडिकल पहुंच रहे हैं। जानकार कहते हैं कि यहां ओपीडी की पर्ची बनवाने के बाद नि:शुल्क इंजेक्शन लगाया जाता है। उधर, निजी अस्पतालों में इंजेक्शन के एक डोज का 400 से 500 रुपए लिया जा रहा है। डॉक्टरों का कहना है कि कुत्ते के काटने के 24 घंटे के अंदर रैबीज इंजेक्शन लगाने से पीड़ित सुरक्षित हो जाता है।

खानपान की दुकानों के पास नजर आते हैं डॉग

शहर के नॉनवेज और खानपान की दुकानों के आसपास डॉग नजर आते हैं। इसके अलावा रहवासी क्षेत्रों की सडक़ों पर ये रात के समय वाहन देखकर उसके पीछे दौड़ लगाते हैं। इससे दहशत में वाहन चालक दुर्घटनाग्रस्त हो रहा है।

प्रोजेक्ट एबीसी

प्रोजेक्ट एनिमल बर्थ कंट्रोल (एबीसी) के तहत नगर निगम ने कठौंदा में डॉग सेल बनाया है, जहां डॉग को सेंटर पर लाया जाता है। इनकी नसबंदी करने के बाद उन्हें उसी स्थान पर वापस छोड़ा जाता है लेकिन हकीकत यह है कि नसबंदी के बाद डॉग को सेंटर से बाहर निकाल दिया जाता है और वे आसपास की कॉलोनियों में घूमते रहते रहते हैं। जानकार कहते हैं कि सेंटर में पोस्ट केयर के लिए जगह नहीं है, जिससे नसबंदी के बाद बीमारी की हालत में ये डॉग खूंखार हो जाते हैं।

इन जगहों पर होता है डॉग अटैक

घमापुर, मदनमहल, शीतलपुरी, कृपाल चौक, संजीवनीनगर, गढ़ा स्याहीनाका, गोलबाजार, पंडा की मढिय़ा, आदर्श कॉलोनी, अहिंसा चौक, ग्रीन सिटी, दीनदयाल चौक से विजयनगर, रामपुर पोलीपाथर में रात होते ही सडक़ पर डॉग दिखाई देने लगते हैं, जो राह चलते लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं।

शहर में प्रतिदिन 20 कुत्तों को पकड़ा जा रहा है। नसबंदी की जाती है। इसकी मॉनीटरिंग भी हो रही है।

भूपेन्द्र सिंह, स्वास्थ्य अधिकारी, नगर निगम