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जबलपुर।
सीबीआई के विशेष न्यायाधीश एसके चौबे की कोर्ट ने भ्रष्टाचार से जुड़े अलग-अलग मामलों में इलाहाबाद बैंक के बर्खास्त अधिकारी को विभिन्न धाराओं के तहत 49 वर्ष की सजा से दंडित किया। कोर्ट ने दोषी अधिकारी पर 19 लाख का जुर्माना भी लगाया। नियमानुसार आरोपी को अलग-अलग धाराओं में सजा सुनाई गई है। इस स्थिति में दोषी अधिकारी को अधिकतम सजा 10 वर्ष भुगतनी पड़ेगी।
अभ्यिोजन के अनुसार इलाहाबाद बैंक, राइट टाउन शाखा, जबलपुर के बर्खास्त अधिकारी मूलत पश्चिम बंगाल निवासी सुनील कुमार हंसदा 1 जून 2009 से 4 अगस्त 2012 के मध्य इलाहाबाद बैंक, शाखा राइट टाउन, जबलपुर में स्केल-1 अधिकारी के पद पर पदस्थ थे। इस दौरान उन्होंने लोक सेवक की हैसियत से पदस्थ रहने के दौरान समय-समय पर लाखों रुपए की गड़बड़ी की। इसके तहत बैंक के ग्राहकों के खातों में जमा राशि कूटरचित तरीके से अपने व्यक्तिगत उपयोग में ली। यूजर आईडी व पासबर्ड चोरी करने का तरीका इस्तेमाल किया गया। सीबीआई कोर्ट ने सभी तथ्यों पर गौर करने के बाद बैंक अफसर को दोषी पाया। दोषी अफसर को को धारा 409 के तहत तीन बार 10-10 साल की सजा सुनाई गई। साथ ही 3-3 लाख का जुर्माना लगाया गया। इस तरह प्रारंभिक सजा 30 साल और जुर्माना 9 लाख लगाया गया। धारा 420 में 5 वर्ष का कारावास और 3 लाख का जुर्माना लगाया गया। धारा 477 में 5 वर्ष का कारावास और 3 लाख का जुर्माना लगाया गया। धारा 13 (1)(सी) व (डी) सहपठित धारा 13 (2) अधिनियम 1988 के तहत 5 वर्ष का कारावास और 3 लाख रुपए जुर्माने की सजा सुनाई गई। इसी तरह धारा 66-सी अधिनियम 2000 के तहत 2 वर्ष के कारावास व 50 हजार जुर्माने की सजा सुनाई गई। वहीं धारा 66 डी अधिनियम के तहत भी 2 साल के कारावास और 50 हजार रुपए के जुर्माने की सजा सुनाई गई। इस तरह कुल सजा 49 साल और कुल जुर्माना 19 लाख हो गया। अभियोजन की ओर से लोक अभियोजक विवेक सिन्हा ने पैरवी की।
Published on:
08 Mar 2020 08:09 pm

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