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प्वाइंटर
07 जिले हैं जबलपुर सम्भाग में
20 लाख के करीब जिले की आबादी
10 क्रिकेट क्लब हैं शहर में
250 खिलाड़ी करते हैं रोजाना प्रैक्टिस
01 भी राष्ट्रीय स्तर का क्रिकेट स्टेडियम नहीं
10 साल में तकरीबन 10 खिलाड़ी ही पहुंचे रणजी तक
जबलपुर। रणजी ट्रॉफी जीतकर मप्र की क्रिकेट टीम ने इतिहास रचा। इसके साथ ही मप्र घरेलू क्रिकेट का पहली बार सरताज बना। मुख्यमंत्री से लेकर मंत्रियों, विधायकों की ओर से क्रिकेट टीम को बधाई का तांता लग गया। जीत की खुशी में मानो क्रिकेट का 'हल्ला बोलÓ हो गया। पड़ोसी जिले शहडोल के भी दो खिलाड़ी इतिहास रचने वाली टीम का हिस्सा थे। लेकिन, जबलपुर सम्भाग के सात जिलों का एक भी खिलाड़ी इतिहास रचने का गवाह नहीं बन पाया। हालांंकि, इसके पहले रणजी टीम में जबलपुर सम्भाग के खिलाडिय़ों को चयन होता रहा है। लेकिन, जबलपुर जिले के खिलाडिय़ों की संख्या ना के बराबर रहती है।
15 किमी दूर मैदान
लाखों की आबादी और सात जिलों के सम्भाग में क्रिकेट को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक इच्छाशक्ति का अंदाजा कोई भी लगा सकता है। शहर में क्रिकेट एकेडमी के बच्चों के अभ्यास के लिए रानीताल स्टेडियम का सहारा है। लेकिन, कई वरिष्ठ खिलाडिय़ों का कहना है कि यहां राष्ट्रीय स्तर की तैयारी करने के लिए पिच ही नहीं बनाई जा सकी। यहां बड़े स्तर के मैचों का माहौल भी नहीं है। मप्र किक्रेट एसोसिएशन ने नीमखेड़ा क्रिकेट मैदान बनवाया है। वहां बड़े मैच खेले जा सकते हैं। लेकिन, क्रिकेट सीखने वालों को अभ्यास करना है, तो 15 किमी दूर आन-जाना ही बड़ी समस्या है।
सम्भाग के जिले
जबलपुर, छिंदवाड़ा, सिवनी, बालाघाट, नरसिंहपुर, डिंडोरी, कटनी, मंडला।
सम्भाग से रणजी तक पहुंचने वालों में ये हैं शमिल
अजय राजपूत
अरशद खान
असद खान
विक्रम जनसारी
आनंद वैश
चंद्रकांत साकोरे
राष्ट्रीय स्तर के लिए परिस्थितियां नहीं
मप्र क्रिकेट एसोसिएशन की तरफ से पूरी कोशिश की जा रही है। सम्भाग के खिलाड़ी रणजी तक पहुंचते भी हैं। अभ्यास के लिए रानीताल स्टेडियम और नीमखेड़ा का स्टेडियम अच्छी स्थिति में हैं। राष्टीय स्तर के क्रिकेट मैच के हिसाब से अभी परिस्थितियां नहीं हैं। नीमखेड़ा में प्रदेश स्तरीय मैच हुए हैं। रणजी मैच कराने के लिए मप्र क्रिकेट एसोसिएशन की ओर से निर्णय लिया जाता है।
धर्मेश पटेल, सचिव, जबलपुर सम्भागीय क्रिकेट एसोसिएशन
किस्मत भी अच्छी होनी चाहिए
शहर में क्रिकेट के लिए माहौल है। यहां क्लबों में अच्छे खिलाड़ी तैयार भी किए जाते हैं। लेकिन, यह बात सही है कि अयास के लिए अच्छे मैदानों की कमी है। गोलबाजार में प्रशिक्षण के लिए मैदान किसी तरह का है, यह किसी से छिपा नहीं है। फिर भी यहां से अच्छे खिलाड़ी निकलते हैं। राष्ट्रीय टीम या रणजी टीम में सिलेक्ट होने में अच्छी किस्मत भी जरूरी है।
किशोर बने, क्रिकेट प्राशिक्षक
खेल मैदानों की सख्त जरूरत
शहर में पूरे सम्भाग के बच्चे क्रिकेट सीखने आते हैं। सभी क्रिकेट क्लब मेहनत से ट्रेनिंग देते हैं। लेकिन, यहां मैदान नहीं हैं। नीमखेड़ा में बड़ा मैदान है। लेकिन, वह शहर से बहुत दूर है। रानीताल स्टेडियम की क्षमता ज्यादा नहीं हैं। नेशनल क्रिकेट का माहौल नहीं है। चिंताजनक है कि शहर में लेदर की जगह टेनिस बॉल से खेलने का चलन बढ़ा है। यह राष्ट्रीय स्तर की तैयारियों में बाधक है।
अजय राजपूत, पूर्व काउंट्री क्रिकेटर
Published on:
01 Jul 2022 06:45 pm
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