
crocodile
जबलपुर. रांझी क्षेत्र के बिलपुरा तालाब के मगरमच्छों को पकडऩे में कानूनी अड़चन भी आड़े आ रही है। वन विभाग की रेस्क्यू टीम के पास जाल, अन्य संसाधन और एक्सपर्ट नहीं हैं। ठेके के जरिए मगरमच्छों को शिफ्ट करने के लिए वन विभाग को वन्यप्राणी मुख्यालय भोपाल से अनुमति लेनी होगी।
बिलपुरा तालाब में मगरमच्छों का कुनबा बढ़ रहा है। रात में मगरमच्छ घरों तक पहुंच जाते हैं। वन विभाग के अधिकारियों ने तालाब में पानी अधिक होने की बात कहकर मगरमच्छों को पकडऩे से हाथ खड़े कर दिए हैं। जबकि स्थानीय लोग ठेके पर मगरमच्छों को पकडऩे की कवायद कर रहे हैं। इसमें भी नियम-कायदे आड़े आ रहे हैं। दरअसल, मगरमच्छ शेड्यूल-एक का वन्यप्राणी है। इसकी शिफ्टिंग के लिए वन्यप्राणी मुख्यालय से अनुमति लेनी होगी।
कौन करेगा भुगतान- वन्यप्राणी विशेषज्ञ धनंजय घोष के अनुसार, विशेषज्ञों की टीम रेस्क्यू के लिए तैयार है। ठेकेदार ने प्रति मगरमच्छ तीन हजार रुपयों की मांग की है। अभी यह तय नहीं है कि ठेकेदार को भुगतान कौन करेगा। वन विभाग या नगर निगम से भुगतान दिलाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
फेंसिंग से हो सकता है बचाव
मोहल्ला समिति बिलपुरा के अध्यक्ष गणेश पाठक का कहना है कि बिलपुरा तालाब वार्ड- ७८ और ७६ दोनों में आता है। यदि मगमरच्छों को जल्द नहीं पकड़ा गया तो कुनबा और बढ़ जाएगा। चारों ओर फेंसिंग कर मगरमच्छों से बचाव किया जा सकता है।
चारों ओर है घनी बस्ती
बिलपुरा तालाब दो वार्डों में आता है। चारों ओर घनी बस्ती है। जगह-जगह सतर्कता बोर्ड लगाए गए हैं। शिकार के बाद पार्षद ने एक ओर ३० फीट जाली लगवा दी है। बाकी तरफ खतरा बरकरार है। समीप बच्चों के तीन स्कूल हैं। सर्दी में धूप सेंकने बाहर निकले मगरमच्छों के फोटो और वीडियो बनाकर लोग चर्चा कर रहे हैं।
पानी अधिक होने से हो रही परेशानी
मौके पर पहुंचे डिप्टी रेंजर गुलाब सिंह राजपूत ने बताया कि तालाब में पानी ज्यादा होने से तत्काल मगरमच्छों को पकडऩे में कठिनाई आ रही है। तीन माह पहले भी सिंघाड़े की खेती करने वालों ने मगरमच्छ होने की शिकायत की थी।
जोखिम का कारण बनेंगे
वन्य प्राणी विशेषज्ञ धनंजय घोष ने बताया कि दो मगरमच्छ और उनके चार बच्चे हैं। नहीं पकड़े गए तो जोखिम का कारण बनेंगे। इस मौके पर नीता सिंह ने चेतावनी दी कि बिलपुरा के लोग कलेक्ट्रेट का घेराव करेंगे।
दहशत में लोग
तालाब से 20 फीट दूर रहने वाले अमन चक्रवर्ती ने बताया, रात एक बजे उसका भाई बाइक से आया तो मगरमच्छ दीवार के पास था। मगरमच्छ हमलावर हुआ तो बाइक गिर गई और उसने गेट से लटककर जान बचाई। क्षेत्र की ही गीता बाई ने बताया कि वे लोग तालाब से थोड़ी दूरी पर थे, तभी मगरमच्छ मुर्गी को भी पकड़ ले गया। सिंघाड़ा उगाने वाले रमेश रैकवार ने बताया कि पहले मगरमच्छ नाव देखकर दूर चला जाता था, लेकिन अब अडिग हो गया है। बिलपुरा मोहल्ला समिति के अध्यक्ष गणेश पाठक ने बताया कि रात में बैठक के दौरान उन्होंने मगरमच्छ को देखा था। राजेश चौधरी एवं महेश चौहान ने बतायातालाब पहले २४ एकड़ में था, अब अतिक्रमण का शिकार हो गया है। इसके चारों और फेंसिंग हो जाए तो लोग सुरक्षित हो जाएंगे।
पानी में नहीं पकड़ सकते
डीएफओ विंसेंट रहीम के अनुसार मगरमच्छ को पानी में नहीं पकड़ा जा सकता। लोगों को सुझाव दिया गया है कि मगरमच्छ ज्यादा देर तक बाहर दिखें तो सूचना दें। बाहर होगा तो पकड़ लिया जाएगा।
Published on:
21 Jan 2018 04:16 pm
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