
Cyber fraud : ब्रांडेड शोरूम का गिफ़्ट बाऊचर जीतने का झांसा देकर साइबर ठग लोगों को शिकार बना रहे हैं। आरोपी मोबाइल फोन पर एक लिंक भेजते हैं, उसे दूसरे नम्बरों पर फॉरवर्ड करने के लिए कहा जाता है। जैसे ही यह लिंक दूसरे यूजर के पास पहुंचता है और वह उसे ओपन करता है, तो उसकी कॉन्टेक्ट लिस्ट स्केमर्स के पास पहुंच जाती है। उन नम्बरों पर पर्सनल मैसेज या लिंक भेजकर साइबर ठग उन्हें निशाना बनाते हैं। हाल ही में शहर के लोगों के पास भी ऐसे लिंक पहुंच रहे हैं।
स्केमर्स जो लिंक भेजते हैं, उसमें एक विनिंग व्हील रहता है। उस पर क्लिक करते ही वह घूमता है। उसमें आकर्षक गिफ्ट मिलने का झांसा दिया जाता है। लेकिन इसके पहले वह लिंक वाला मैसेज 50 या 100 लोगों को भेजने की बात लिखी आती है। यूजर गिफ्ट जीतने के लालच में लिंक को फॉरवर्ड करना शुरू कर देते है। यह मैसेज पर्सनल मैसेज के जरिए फॉरवर्ड होते हैं। ग्रुप में भेजने पर पूरी प्रक्रिया फेल हो जाती है। जैसे ही कोई व्यक्ति अपने मोबाइल पर परिचित द्वारा भेजे गए इस लिंक को क्लिक करता है, तो उसकी फोनबुक लिंक के जरिए कॉपी हो जाती है। यह पूरी फोन बुक स्केमर्स के हाथ लग जाती है। इसके बाद आरोपियों द्वारा उन्हें पर्सलन मैसेज भेजा जाता है। जिसमें कभी वे बैंक अधिकारी बनते हैं, तो कभी अन्य तरीकों से उसे ठगने का प्रयास करते है।
साइबर अपराधों से बचने के लिए विशेष जन जागरुकता अभियान ‘‘सेफ क्लिक’’ का आयोजन किया जा रहा है। गुरुवार को आइजी अनिल सिंह कुशवाह, डीआइजी अतुल सिंह और एसपी संपत उपाध्याय समेत अन्य पुलिस अधिकारियों ने तिलवारा रोड स्थित ज्ञान गंगा कॉलेज में छात्रों से संवाद किया। उन्हें साइबर अपराधों से बचाव की जानकारी दी। सोशल मीडिया और यूपीआइ का उपयोग करते समय रखी जाने वाली सावधानियों के बारे में बताया। कहा कि ओटीपी या एटीएम पिन को किसी के साथ शेयर न करें, झूठे प्रलोभन से बचें, साइबर क्राइम हेल्प लाइन नंबर 1930 पर काल करें। अपनी शिकायत नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर भी दर्ज कराएं।
Cyber fraud : स्केमर्स ठगी की वारदात को अंजाम देने के लिए नए-नए तरीके अपना रहे हैं। किसी भी लिंक को मोबाइल पर ओपन नहीं करना चाहिए। यदि ऐसा करते हैं, तो ठगी का शिकार हो सकते हैं।
Updated on:
14 Feb 2025 01:16 pm
Published on:
14 Feb 2025 12:06 pm
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