
dhanush cannon
जबलपुर. सेना के हथियार और वाहनों का उत्पादन देश में करने की दिशा में काम हो रहा है। इस क्षेत्र में उत्पादन की व्यापक सम्भावनाएं हैं। इन उत्पादों के लिए कलपुर्जों की जरूरत होती है। इन्हें स्थानीय स्तर पर तैयार करें, तो आयात पर निर्भरता कम हो जाएगी। जबलपुर में वीकल फैक्ट्री और सेना के संस्थान हैं, इनके लिए सप्लाई चेन बनें। यह बात वेंडर कॉनक्लेव फॉर ऑटोमोबाइल एंड डिफेंस सेक्टर में शुक्रवार को आयोजक आर्मर्ड वीकल निगम लिमिटेड, वीकल फैक्ट्री जबलपुर तथा मप्र इंडस्ट्रीयल डेवलपमेंट कारपोरेशन व सेना के अधिकरियों ने कहीं। शुक्रवार को बिलहरी के एक होटल में आयोजित वेंडर मीटर में जबलपुर और मप्र के साथ दूसरे राज्यों से वेंडर पहुंचे। उन्हें रक्षा क्षेत्र में ऑटोमोबाइल से जुडे़ कलपुर्जों के उत्पादन की जानकारी दी गई।
कार्यक्रम में आर्मर्ड वीकल निगम लिमिटेड के सीएमडी संजय द्विवेदी का कहना था कि कंपनी को छह सौ करोड़ के कलपुर्जे आयात करने पड़ते हैं। एमपीआइडीसी की कार्यकारी संचालक सृष्टि प्रजापति ने बताया कि स्थानीय उद्यमियों को फैक्ट्री में पार्ट्स सप्लाई के अवसर के लिए कॉन्क्लेव किया गया है।
फ्यूल टैंक का आयात करते हैं
सेना के प्रजेंटेशन में बताया गया कि टैंक, तोप में हजारों उपकरण लगते हैं। ज्यादातर कलपुर्जों के लिए एमएसएमई सेक्टर पर ही निर्भर हैं। लेकिन, अभी कई कम्पोनेंट विदेश या दूसरी कंपनियों से लेने पड़ते हैं। युद्धक टैंक का फ्यूल टैंक तक आयात करना पड़ता है। मप्र में इसके लिए बेहतर सम्भावनाएं हैं। सेना अब स्वदेशीकरण पर ध्यान दे रही है। नए के साथ पुराने हथियारों का स्वदेशी वर्जन तैयार करने के लिए काम किया जा रहा है। आयुध निर्माँणियों में जो पार्ट्स नहीं बनते, वे देश की छोटी इंडस्ट्री में बन रहे हैं।
स्थानीय उद्योगों को मिले काम
कॉन्क्लेव में स्थानीय औद्योगिक संगठनों की तरफ से अपनी बात रखी गई। महाकोशल चेम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के अध्यक्ष रवि गुप्ता ने कहा कि जबलपुर की डिफेंस एंसेलरीज ने कई उत्पाद विकसित किए हैं। इस काम में व्यय भी हुआ, लेकिन लम्बे समय तक काम नहीं मिलने के कारण वे हतोत्साहित होते हैं। महाकोशल उद्योग संघ की तरफ से कार्यकारी अध्यक्ष डीआर जेसवानी एवं प्रवीण शर्मा ने अपनी बात रखी। भोपाल गोविंदपुरा के उद्योगपति प्रखर तिवारी ने अपनी समस्याएं बताई कि डिफेंस में काम करना कठिन होता है। इस प्रक्रिया को सरल बनाया जाए, तो टैंक और तोप भी बन सकते हैं।
कार्यक्रम में एमपीआइडीसी की सीजीएम वर्तिका राय, ब्रिगेडियर शैलेष उनियाल, वीएफजे ज्वाइंट जीएम रामेश्वर मीणा, एमपीआइडीसी के महाप्रबंधक आरपी चक्रवर्ती, 506 आर्मी बेस वर्कशॉप से लेफ्टीनेंट कर्नल मनदीप सिंह के अलावा आर्मर्ड वीकल निगम लिमिटेड की इकाइयों और शहर की आयुध निर्माणियों के अधिकारी मौजूद थे।
Published on:
23 Sept 2023 12:58 pm
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