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अवैध रेत खनन से नष्ट हो रहीं घडि़यालों की मांद 

सोन घडि़याल अभयारण्य में सक्रिय माफिया, एनजीटी ने किया सर्वे

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mukesh gaur

Mar 17, 2016

ghadiyal

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जबलपुर। सोन नदी के घडि़याल अभ्यारण में भी वन्य प्राणी सुरक्षित नहीं हैं। नदी में घडि़याल और मगरमच्छों की मांद पर रेत माफिया की नजर लग गई है। सोन नदी में दुर्लभ घडि़याल पाए जाते हैं। इस क्षेत्र को घडि़याल अभयारण्य के रूप में संरक्षित किया गया है। मादा घडि़याल और मगरमच्छ रेत के बीच अंडे दबा देती हैं। रेत खनन से अंडे या तो पहियों से कुचल जाते हैं या ट्रक-ट्रॉलियों में लोड होने से क्षतिग्रस्त हो जाते हैं।

रात में पकड़ा हाइवा
संजय टाइगर रिजर्व के रेंजर बगदरा डीआर जाटव और टीम ने मंगलवार रात लगभग एक बजे जांच अभियान चलाया, तो सोन घडि़याल अभयारण्य के बीछी बीट क्षेत्र में खनन का खुलासा हुआ। मिनी हाइवा और खनन के औजार जब्त किए गए। एनजीटी की टीम ने सोन घडि़याल अभ्यारण में अवैध रेत खनन का जायजा लिया था। टीम ने अभ्यारण के सीमा का पुनरीक्षण करते हुए हनुमानगढ़ से देवघटा 31.25 किमी क्षेत्र को अभयारण्य से अलग करने को कहा है। इसका प्रस्ताव राज्य वन प्राणी बोर्ड को भेजा गया है। एनजीटी के अनुसार जिधर घडि़याल नहीं हैं, उस क्षेत्र को अभ्यारण से अलग होना चाहिए, जबकि पर्यावरण व वन्य प्राणी का हर हाल में संरक्षण किया जाना चाहिए।
सोन घडि़याल अभ्यारण के बीछी क्षेत्र में अवैध उत्खनन हो रहा था। टीम ने रात में रेत से भरा हाइवा जब्त किया है।
डॉ. दिलीप कुमार, डायरेक्टर, संजय टाइगर रिजर्व

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