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भावांतर पंजीयन के लिए जमा फार्म गायब, भटक रहे किसान

दस्तावेज बने परेशानी की जड़, नए फार्म में पटवारी के दस्तखत कराने काट रहे चक्कर

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Deposits for missing registration forms are missing

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गोटेगांव. सहकारी समितियों के कर्मचारियों की हड़ताल के चलते भावांतर योजना के तहत किसानों के पंजीयन की जिम्मेदारी मंडी प्रशासन को सौंपी थी। किसानों ने मंडी प्रंागण में खुले काउंटर पर भावांतर योजना के फार्म जमा किए थे, लेकिन उन्हें पावती नहीं दी गई थी। उन फार्मों को कर्मचारियों ने कचरे की तरह एकत्रित करके पंजीयन करने वाले ऑपरेटरों के पास ढेर लगाकर रख दिए। ऑपरेटरों ने कुछ ही फार्मों का ऑनलाइन पंजीयन किया और शेष फार्मों को अपने कक्ष में ही रख दिया।


फार्म का पंजीयन नहीं हुआ
सहकारी समितियों के कर्मचारियों की हड़ताल समाप्त होने के बाद शासन का मंडी के पास आदेश आया कि जिन फार्मों का पंजीयन नहीं हुआ है ऐसे फार्मों को संबंधित सोसाइटियों के पास पहुंचाने की व्यवस्था की जाए। कृषि उपज मंडी सचिव आरएन त्रिपाठी का कहना है कि नए आदेश आने के बाद उनके पास जो शेष फार्म पंजीयन के लिए बचे थे वह संबंधित समितियों को प्रदान कर दिए गए हैं, जिनकी पावती उनके पास है। वहीं मंडी में फार्म जमा करने वाले अधिकांश किसानों का कहना है कि उनका भावांतर योजना के तहत दिए गए फार्म का पंजीयन नहीं हुआ है। मंडी जाते हैं तो कहा जाता है कि समिति वालों के पास जाओ और समिति वालों के पास पहुंचते हैं तो कहा जाता है कि यहां पर फार्म नहीं आया है। ऐसे में हम किसान पंजीयन कराने हलाकान हो रहे हैं।


किसान डालचंद पटैल निवासी परसवाड़ा का कहना है कि कमोद सोसाइटी और मंडी दोनों जगह फार्म खोजा, लेकिन कहीं नहीं मिला। इसलिए अब पंजीयन कराने के लिए नया फार्म भर कर पटवारी के पास सत्यापन कराने के लिए आए हैं, ताकि उनका पंजीयन भावांतर योजना के तहत हो सके। कृषक का कहना है कि ९ मार्च को मंडी में फार्म जमा किया था, उस वक्त किसी प्रकार की पावती नहीं दी गई। यही बात शारदा प्रसाद सिंह पटैल देवनगर पुराना निवासी, शिवराज पटैल ग्राम झामर निवासी एवं प्रवेश कुमार पटेल परसवाडा निवासी ने भी बताई है। किसानों को कहना है कि फार्म गुमने के कारण नए सिरे से पटवारी के पास आकर सत्यापन कराने का कार्य कराना पड़ रहा है। इस तरह के अनेक किसान है जिनको जमा किए गए फार्म नही मिल रहे हंै। किसानों का कहना है कि भावांतर योजना के तहत पंजीयन की अंतिम तिथि २४ मार्च को तीन दिन शेष बचे हैं, लेकिन उनको पंजीयन की कोई पार्वती तक प्राप्त नही हो रही है।


जिम्मेदारी नहीं कर रहे पूरा
मंडी सचिव आरएन त्रिपाठी का कहना है कि हड़ताल के चलते उनके पास भावांतर योजना का पंजीयन करने के लिए करीब छह हजार फार्म आए थे, जिसमें से डेढ़ हजार किसानों का पंजीयन मंडी में किया गया, शेष फार्म आदेश मिलने पर समिति वालो को सौंप दिए गए हैं। समिति वाले अपनी जिम्मेदारी को पूरा नहीं करके किसानों को व्यर्थ भटकाने का कार्य कर रहे हैं, जबकि उन्होंने जो फार्म समिति को प्रदान किए हैं उसकी पावती भी है। तहसीलदार धर्मेन्द्र चौकसे का कहना है कि जिन किसानों का भावातंर के तहत पंजीयन हो गया है ऐसे किसानों के फार्म सत्यापन के लिए उनके पास आए हैं, जिनको संबंधित पटवारी सत्यापन करके संबंधित संस्था के पास पहुंचा रहे हैं।