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भाभी-देवर के रिश्ते पर उठी अंगुली, देवर ने जहर खाकर साबित की पवित्रता

खुद मरकर रिश्तों को जीवन दे गए लाला, रंग-समागम में मंच पर छाया बुंदेली का रंग : दिलों को छू गई कहानी

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devar suicide from bhabhi love

devar suicide from bhabhi love

जबलपुर। युग कोई भी रहा हो, या फिर राजा कोई भी। चरित्र के नाम पर स्त्रियों को प्रश्नांकित करना और उन्हें विवश करना, सत्ता का चरित्र रहा है। स्त्री का चरित्र आजीवन उसका पीछा करता है। कुछ एेसा ही घटित हुआ आेरछा नरेश जुझार सिंह की रानी चम्पावती के साथ। मुगलिया सल्तनत ओरछा नरेश को यह विश्वास दिलाने में सफल हुई कि उनकी रानी चम्पावती और उनके छोटे भाई के बीच अनुचित संबंध हैं और सत्ता के लोभ में ही लाला हरदौल ने युद्धवाहिनी तैयार की।

जुझार सिंह की अतिरिक्त चिन्ता में निर्मित युद्ध वाहिनी ही उनके और उनके भाई के प्रेम के नाश का आधार बनी। रंग-समागम २०१८ के तीसरे दिन भोपाल के कलाकारों ने बुंदेली की मधुरता में रचे बसे नाटक लाला हरदौल का मंचन किया। तरंग प्रेक्षागृह में चल रहे राष्ट्रीय नाट्य समारोह में मंचित नाटक लाला हरदौल की कहानी से तो हर कोई वाकिफ था, लेकिन मंच पर इसकी प्रस्तुति ने दर्शकों को भाव-विभोर कर दिया।

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फिर हुआ ये..
ओरछा लौटते ही जुझार सिंह ने चम्पावती को बुलाया और पत्नीधर्म एवं चरित्र निष्ठा की प्रतिष्ठा के नाम पर उनकी परीक्षा लेने घृणित प्रस्ताव सामने रखा। जुझार ने कहा कि यदि तुम मुझे प्रेम करती हो और अपने पत्नीधर्म में सत्यनिष्ठ हो, तो तुम्हें हरदौल को अपने हाथों से विष दे कर उनकी ह्त्या करनी होगी। चम्पावती के तमाम विरोध और याचनाएं पतिधर्म एवं राजाज्ञा के आगे नाकाम रहीं। पूरे षड्यंत्र और खीर में विष होने की सूचना लाला हरदौल को उनके गुप्तचरों ने पहले ही दे दी थी। परन्तु उन्होंने अपने भाई अथवा रानी चम्पावती से प्रश्न तो दूर एक शब्द या एक दृष्टि भी न उठाई। और अपनी मां समान भाभी की अग्निपरीक्षा को सफल करने बिना किसी प्रश्न के, अपने संबंधों की धवलता को साबित करने विष मिली पूरी खीर खा ली, और प्राण त्याग दिए।

मंच के कलाकार
नाटक का निर्देशन बालेन्द्र सिंह ने किया। कलाकारों में मुख्य रूप से संतोष, सोनू, अजय, भरत, आदित्य, रंजना तिवारी, शैलेष, यामिनी, योगेश, मुकेश आदि शामिल रहे। मेकअप सीमा ने, लेखन कोमल कल्याण जैन ने किया।