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जबलपुर. एसोसिएशन ऑफ फिजिशियन ऑफ इंडिया लोकल ब्रांच और माही मेडिकल एंड रिसर्च फाउंडेशन की ओर से डायबिटीज पर नियंत्रण के लिए आयोजित इंसुकॉन कॉन्फ्रेंस में विशेषज्ञों ने कहा कि दवा लेने से जिन मरीजों की शुगर कंट्रोल नहीं होती है, उन्हें इंसुलिन की जरुरत होती है। सामान्य: गर्भावस्था की शुगर टाइप-१ डायबिटीज और शराब पीने के आदि सेकेंडरी डायबिटीज से पीडि़त मरीजों पर दवाई का असर नहीं होता है। इनको इंसुलिन ट्रीटमेंट देना पड़ता है। इसमें भी दवा का ध्यान रखना जरूरी है। कुछ दवा से शिशु की शुगर लो हो जाती है। उसकी मौत भी हो सकती है। एेसे ही डायबिटीज रोगों की जांच और उपचार के नई तरीकों को लेकर दिल्ली से आए डॉ. अमित गुप्ता, रायपुर के डॉ. प्रशांत आडवानी ने विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने हृदय संबंधी रोगों और दौरा पडऩे के बाद बढ़ी शुगर को बेसल इंसुलिन से कंट्रोल करने का तरीका बताया। इससे पहले राइट टाउन में एक होटल में कार्यक्रम का शुभारंभ मप्र आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. आरएस शर्मा के आतिथ्य में हुआ। अध्यक्षता डॉ. अशोक खन्ना ने की।
विशेषज्ञ चिकित्सक ने कहा-
शहर के मोटापा एवं डायबिटीज रोग विशेषज्ञ डॉ. आशीष डेंगरा ने बॉयोसिमिलर इंसुलिन को लेकर जानकारी दी। उन्होंने बताया कि टाइप-2 डायबिटीज की शुरुआती अवस्था में दवाइयों से पीडि़त के ब्लड शुगर को नियंत्रित किया जा सकता है। पीडि़त यदि यदि खानपान व व्यायाम और चिकित्सक के परामर्श की अनदेखी करता है तो उसे आगे जाकर इंसुलिन लेना पड़ सकता है। इसलिए डायबिटीज होने पर संतुलिन भोजन, व्यायाम एवं समय पर दवा लेना आवश्यक है।
ये रहे उपस्थित-
कॉन्फ्रेंस में डॉ. वीके भारद्वाज, डॉ. परिमल स्वामी, डॉ. विशाल कस्तवार, एसके गौतम, डॉ. एसके मिश्रा, डॉ. अमलान हर्षे, डॉ. जीएस संधु, डॉ. नीरज बड़ेरिया, डॉ. समीर गुप्ता, डॉ. संजय नेमा, डॉ. अखिलेश दुबे, डॉ. पुष्पराज पटेल सहित विभिन्न जिलों से आए चिकित्सक उपस्थित थे।
Published on:
31 Mar 2019 10:29 pm

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