
High Court of Madhya Pradesh
जबलपुर. मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा कि दिवंगत कर्मी की दिव्यांग बेटी 25 वर्ष से अधिक आयु की होने पर भी फेमिली पेंशन पाने की हकदार है। जस्टिस सुजय पॉल की सिंगल बेंच ने इस मत के साथ सरकार को निर्देश दिया कि 60 दिन के भीतर याचिकाकर्ता को फैमिली पेंशन का लाभ प्रदान किया जाये। उसे एरियर्स व इंक्रीमेंट का भी लाभ दिया जाये। कोर्ट ने कहा कि ऐसा न किये जाने की सूरत में 12 फीसदी ब्याज सहित राशि का भुगतान करना होगा।
यह है मामला
भोपाल निवासी रुकमणि तिवारी की ओर से अधिवक्ता सुधा गौतम ने कोर्ट को अवगत कराया कि याचिकाकर्ता के पिता शासकीय कर्मी थे। उनका निधन हो जाने के बाद याचिकाकर्ता की मां को फैमिली पेंशन का लाभ मिला। जब मां का निधन हो गया तो याचिकाकर्ता ने फैमिली पेंशन के लिये आवेदन किया। लेकिन 25 वर्ष से अधिक आयु होने का हवाला देकर फैमिली पेंशन देने से मना कर दिया गया। तर्क दिया गया कि याचिकाकर्ता 56 वर्ष की होने के अलावा दिव्यांग है। ऐसे में सर्विस रूल के हिसाब से आवेदन नामंजूर नहीं किया जा सकता। अंतिम सुनवाई के बाद कोर्ट ने याचिका स्वीकार कर सरकार को निर्देश दिए कि याचिकाकर्ता को 60 दिन में पेंशन, एरियर्स व अन्य सम्बंधित भुगतान किए जाएं।
Published on:
01 Aug 2020 09:20 pm
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