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महाकोशल को मंत्रिमंडल में प्रतिनिधित्व नहीं देने पर दायर याचिका ख़ारिज

हाईकोर्ट ने कहा- मंत्री बनाने का निर्देश देना कोर्ट का नहींराज्यपाल-मुख्यमंत्री का विवेकाधिकार

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जबलपुर. मप्र हाईकोर्ट ने कहा कि सरकार को मंत्री बनाए जाने का निर्देश देना न्यायालय के क्षेत्राधिकार में नहीं आता। यह राज्यपाल और मुख्यमंत्री के विवेकाधिकार का क्षेत्र है। चीफ जस्टिस मोहम्मद रफीक और जस्टिस विजय कुमार शुक्ला की डिवीजन बैंच ने यह मत प्रकट किया। इस पर याचिका वापस लेने का आग्रह कर दिया गया। कोर्ट ने इस पर याचिका खारिज कर दी।
नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच के डॉ. पीजी नाजपांडे, रजत भार्गव की ओर से याचिका दायर कर कहा गया कि प्रदेश के मंत्रिमंडल में महाकोशल क्षेत्र के किसी भी विधायक को स्थान नहीं दिया गया है। यह समानता के अधिकार का भी उल्लघंन है। अधिवक्ता दिनेश उपाध्याय ने कोर्ट को बताया कि याचिकाकर्ता ने इस मामले में राज्यपाल के समक्ष याचिका दायर की थी, लेकिन अभी तक याचिका का निराकरण नहीं किया गया है। आग्रह किया गया कि राज्यपाल को याचिका का निराकरण करने को कहा जाए। साथ ही सरकार को निर्देश दिए जाएं कि महाकोशल क्षेत्र को मंत्रिमंडल में प्रतिनिधित्व दिया जाए। प्रारंभिक सुनवाई के बाद कोर्ट ने वापस लेने के आधार पर याचिका निरस्त कर दी।