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सरकार की अच्छी पहल: अब समाज के विवाद निपटेंगे, लोक अदालत से मिलेगी मान्यता

राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की अभिनव पहल, प्रशिक्षित किए जा रहे मीडियेटर  

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disputes of the society

जबलपुर। राज्य में एक ही जाति-समाज के लोगों के बीच होने वाले छोटे-मोटे झगड़े-विवादों का निपटारा अब उसी जाति-समाज में होगा। सम्बंधित जाति-समाज के प्रशिक्षित मीडिएटर ही ऐसे विवादों में सुलह कराएंगे। बाद में इस समझौते को लोक अदालत में प्रस्तुत कर बाकायदा कानूनी जामा पहनाया जाएगा। मप्र राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण ने अपने कम्यूनिटी मिडिएशन कार्यक्रम के तहत यह अभिनव पहल की है। इन मीडिएटर्स को ऑनलाइन प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इस प्रयास से निस्संदेह अदालतों में मुकदमों की संख्या कम होने की उम्मीद जताई जा रही है।

न्यायाधीश करेंगे समझौता लागू
दोनों पक्षों को विभिन्न पहलुओं के बारे में समझाइश देकर समझौता कराया जाएगा। समझौते को दोनों पक्षों के बीच कानूनन बाध्यकारी बनाने के लिए इसके दस्तावेज लोक अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए जाएंगे। न्यायाधीश के जरिए इसे विधिवत लागू कराया जाएगा।

40 घंटे का गहन प्रशिक्षण
कम्युनिटी मीडिएशन कार्यक्रम के तहत मीडिएटर्स को 40 घंटे का गहन ऑनलाइन प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्राधिकरण के कार्यालय से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए यह ऑनलाइन प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रतिदिन चल रहा है। प्राधिकरण की सदस्य सचिव गिरिबाला सिंह व मप्र हाइकोर्ट विधिक सेवा समिति के सदस्य सचिव राजीव कर्महे बतौर एक्सपर्ट ट्रेनर प्रशिक्षण दे रहे हैं। हर जाति-समाज के 25-25 मीडिएटर्स को प्रशिक्षित कर इस कार्य में लगाने का लक्ष्य रखा गया है।

नेमा, गोंड समाज में दिया प्रशिक्षण
कोरोनाकाल में प्राधिकरण ने इस योजना के तहत मीडिएटर्स का प्रशिक्षण आरम्भ किया है। प्रथम चरण में नेमा व गोंड जाति-समाज के 25-25 मीडिएटर्स को प्रशिक्षित किया जा चुका है। ये प्रशिक्षित मीडिएटर अपनी जाति-समाज के लोगों के बीच आपस मे होने वाले ऐसे विवादों में सुलह की राह खोजेंगे, जिनके निकट भविष्य में बड़े रूप में परिवर्तित होकर अदालत के समक्ष जाने की सम्भावना होती है।

कम्युनिटी मीडिएशन से पुरानी पंचायतों की तर्ज पर विवादों को प्रारम्भिक दशा में ही समझौते से निपटा लिया जाएगा। इससे अदालतों के समक्ष आने वाले मुकदमों में कमी होगी।
- डीके सिंह, उप सचिव मप्र राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण