
kamal
जबलपुर. ताल-तलैया से लेकर पोखरों में दीपोत्सव के लिए कमल तैयार हैं। जलस्रोतों में खिले श्वेत व गुलाबी रंग के खिले हुए कमल आकर्षक नजर आ रहे हैं। नगर से लेकर जबलपुर ब्लॉक के कई इलाके व सिहोरा, मंझौली क्षेत्र के तालाबों में कमल की खेती हो रही है। दीपावली पर धन की देवी लक्ष्मी को कमल के पुष्प अर्पित किए जाते हैं। मंदिरों से लेकर घरों, प्रतिष्ठानों में पूजन के लिए कमल के पुष्पों की मांग रहती है। इसे देखते हुए किसान बड़े पैमाने पर कमल की खेती करते हैं।
फैक्ट फाइल-
-225 एकड़ में खिले कमल
-150 तालाब में आंशिक रूप से होती है खेती
-250 किसान जुड़े, सिहोरा, मंझोली, जबलपुर के
-3 हजार से ज्यादा छोटे-बड़े तालाब
-3 हजार हेक्टेयर से ज्यादा रकबा
कमल गटा का भी अर्पण-
कमल के पुष्प के साथ ही मैया को कमल गटा भी अर्पित किया जाता है। सामान्य दिनों में पांच रुपए तक मिल जाने वाले कमल के पुष्प और कमल गटा की कीमत दीपावली पर्व के अवसर पर दस से पंद्रह रुपए तक हो जाती है।
सब्जी के लिए उपयोग होती है मुरार-
कमल का पुष्प जहां पूजन में चढ़ाया जाता है, पौध से निकलने वाली मुरार का उपयोग सब्जी बनाने के लिए किया जाता है। सब्जी मंडी में मुरार की खासी मांग रहती है। उद्यानिकी विशेषज्ञों के अनुसार कुछ किसान कमल के मखाने भी तैयार करते हैं। हालांकि जिले में ऐसे किसानों की संख्या कम है। मखाना दरअसल कमल के फूल के बीज से बनता है। लोग इसे फूल मखाना भी कहते हैं। कमल फूल के कई हिस्से बाज़ार में मिलते हैं जैसे कमल ककड़ी जो कि इसके पौधे का तना होता है और पानी के नीचे होता है। इसके अलावा पूजा में कमल के पत्ता का भी उपयोग होता है।
मौसम अनुकूल होने से इस बार जिले में कमल की खेती अच्छी है। तालाब-पोखरों में अच्छी गुणवत्ता के कमल खिल रहे हैं। दीपावली पर्व पर कमल के पुष्प की मांग को देखते हुए किसान कमल की खेती कर रहे हैं।
- एसके मिश्रा, उद्यानिकी विशेषज्ञ
Updated on:
27 Oct 2023 12:20 pm
Published on:
27 Oct 2023 11:42 am
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