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जबलपुर। महीने भर की तैयारी के बाद आखिरकार इंतजार की घड़ियां खत्म हुई और दीपावली का पर्व आ गया। दीपावली पर माता लक्ष्मी का पूजन यदि विधि विधान से किया जाए और आरती के समय कुछ बातों का ध्यान रखा जाए तो पूजन सफल होता है। ज्योतिषाचार्य सत्येंद्र स्वरूप शास्त्री के अनुसार देवी लक्ष्मी शीघ्र प्रसन्न होती हैं। लेकिन विधि-विधान से पूजन करने के बाद तो आइए जानते हैं देवी लक्ष्मी की पूजन विधि और सामग्री व संकल्प तथा लक्ष्मी जी की आरती।
लक्ष्मी पूजन की विधि- सामग्री- चावल, कुमकुम, दीपक, तेल, रुई, धूपबत्ती, अष्टगंध। गुलाब के फूल। प्रसाद के लिए फल, दूध, मिठाई, नारियल, पंचामृत, सूखे मेवे, शक्कर, पान, दक्षिणा में से जो भी हो। लक्ष्मी पूजन की सरल विधि किसी भी कार्य या पूजन को शुरु करने से पहिले श्री गणेश का स्मरण करें। देव मूर्ति के स्नान के लिए तांबे का पात्र, तांबे का लोटा, जल का कलश, दूध, देव मूर्ति को अर्पित किए जाने वाले वस्त्र व आभूषण।
पूजन सामग्री
चावल, कुमकुम, दीपक, तेल, रुई, धूपबत्ती, अष्टगंध। गुलाब के फूल। प्रसाद के लिए फल, दूध, मिठाई, नारियल, पंचामृत, सूखे मेवे, शक्कर, पान, दक्षिणा में से जो भी हो। देव मूर्ति के स्नान के लिए तांबे का पात्र, तांबे का लोटा, जल का कलश, दूध, देव मूर्ति को अर्पित किए जाने वाले वस्त्र व आभूषण।
ऐसे करें सकंल्प
पूजन शुरू करने से पहले सकंल्प लें । संकल्प करने से पहले हाथों में जल, फूल व चावल लें। सकंल्प में जिस दिन पूजन कर रहे हैं उस वर्ष, उस वार, तिथि उस जगह और अपने नाम को लेकर अपनी इच्छा बोलें। अब हाथों में लिए गए जल को जमीन पर छोड़ दें। किसी विशेष मनोकामना के पूरी होने की इच्छा से किए जाने वाले पूजन में संकल्प की जरूरत होती है। निष्काम भक्ति बिना संकल्प के भी की जा सकती है।
श्री लक्ष्मी पूजन की सरल विधि
किसी भी कार्य या पूजन को शुरू करने से पहिले श्री गणेश का पूजन किया जाता हैं।
भगवान गणेश को स्नान कराएं। वस्त्र अर्पित करें।
गंध, पुष, अक्षत अर्पित करें।
अब देवी लक्ष्मी का पूजन शुरू करें।
जिस मूर्ति में माता लक्ष्मी की पूजा की जानी है। उसे अपने पूजा घर में स्थान दें।
मूर्ति में माता लक्ष्मी आवाहन करें। आवाहन यानी कि बुलाना।
माता लक्ष्मी को अपने घर बुलाएं।
माता लक्ष्मी को अपने अपने घर में सम्मान सहित स्थान देें।
अब माता लक्ष्मी को स्नान कराएं।
स्नान पहले जल से फिर पंचामृत से और वापिस जल से स्नान कराएं।
अब माता लक्ष्मी को वस्त्र अर्पित करें।
वस्त्रों के बाद आभूषण पहनाएं। अब पुष्पमाला पहनाएं।
अब कुमकुम तिलक करें। अब धूप व दीप अर्पित करें।
माता लक्ष्मी को गुलाब के फूल विशेष प्रिय है।
घी या तेल का दीपक लगाएं। आरती करें।
आरती के पश्चात् परिक्रमा करें।
महालक्ष्मी पूजन के दौरन ’’ऊँ महालक्ष्मयै नमः’’इस मंत्र का जप करते रहें।
लक्ष्मीजी की आरती
ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता ।
तुमको निसदिन सेवत हर-विष्णु-धाता ॥ॐ जय...
उमा, रमा, ब्रह्माणी, तुम ही जग-माता ।
सूर्य-चन्द्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता ॥ॐ जय...
तुम पाताल-निरंजनि, सुख-सम्पत्ति-दाता ।
जोकोई तुमको ध्यावत, ऋद्धि-सिद्धि-धन पाता ॥ॐ जय...
तुम पाताल-निवासिनि, तुम ही शुभदाता ।
कर्म-प्रभाव-प्रकाशिनि, भवनिधि की त्राता ॥ॐ जय...
जिस घर तुम रहती, तहँ सब सद्गुण आता ।
सब सम्भव हो जाता, मन नहिं घबराता ॥ॐ जय...
तुम बिन यज्ञ न होते, वस्त्र न हो पाता ।
खान-पान का वैभव सब तुमसे आता ॥ॐ जय...
शुभ-गुण-मंदिर सुन्दर, क्षीरोदधि-जाता ।
रत्न चतुर्दश तुम बिन कोई नहिं पाता ॥ॐ जय...
महालक्ष्मीजी की आरती, जो कई नर गाता ।
उर आनन्द समाता, पाप शमन हो जाता ॥ॐ जय...
(आरती करके जल छोड़ें एवं स्वयं आरती लें, पूजा में सम्मिलित सभी लोगों को आरती दें फिर हाथ धो लें।)
Published on:
18 Oct 2017 02:24 pm
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