
Raids on medical shops in TN over illegal sale of prescription drugs
drugs news: शहर में नशे के लिए कफ सीरप की चोरी छिपे खेप आ रही है। ये मुख्य बाजार से हटकर डिस्ट्रीब्यूटर्स की दुकान तक पहुंच रही है। वहां से चोरी-छिपे गली-मोहल्लों तक कफ सीरप की धड़ल्ले से बिक्री हो रही है। कमाई के खेल में थोक विक्रेता औषधि नियमों की धज्जियां उड़ा रहे है।
कोडीन फास्फेट युक्तकफ सीरप का शहर में नशे में चलन बंद नहीं हो रहा है। नशे के लिए कफ सीरप बेचकर जयादा कमाई करने के फेर में कारोबारी अलग-अलग तरकीब भिड़ा रहे हैं। मुख्य बाजार में थोक विक्रेताओं पर औषधि विभाग ने निगरानी बढ़ाई, तो कफ सीरप के अवैध कारोबार के नए रास्ते खोज लिए गए। शहर में कॉलोनी और मोहल्ले के बीच खुली डिस्ट्रीब्यूटर की दुकानों में गुपचुप तरीके से कफ सीरप पहुंच रही हैं। सूत्रों की मानें, तो ऐसे थोक विक्रेताओं से लेकर कफ सीरप का नशा करने वालों तक इसकी आपूर्ति का नेटवर्क बना है। अवैध बिक्री के खेल में कफ सीरप की ज्यादा कीमत वसूलकर मोटी कमाई का खेल चल रहा है। औषधि विभाग की अलग-अलग क्षेत्रों की कुछ दुकानों में की गई जांच में गुपचुप कफ सीरप की अवैध बिक्री के खेल की ओर इशारा मिला है।
- 02 गुना से ज्यादा हो गई लॉकडाउन के समय से सीरप की अवैध बिक्री
- 100-150 रुपए के करीब है सीरप के सौ एमएल की शीशी की कीमत
- 170-220 रुपए तक प्रति शीशी की देर पर बेचकर कर रहे अवैध कमाई
दूसरे शहरों से हो रही तस्करी
नशे के लिए कफ सीरप बेचने के लिए दूसरों शहरों से तस्करी के जरिए खेप पहुंच रही है। सूत्रों के अनुसार दिल्ली, इंदौर, प्रयागराज जैसे शहरों से कुछ कारोबारी कफ सीरप की खेप मंगवा रहे हैं। इससे पहले शहर और रीवा-सतना में कफ सीरप की बड़ी खेप पकड़ी जा चुकी है। अवैध तरीके से आ रही सीरप का रेकॉर्ड थोक और फुटकर दवा कारोबारी नहीं रखते। गुपचुप तरीके से स्टॉक खपाया जा रहा है।
तीन थोक कारोबारी के लाइसेंस निलम्बित
औषधि विभाग को जांच हाल में जांच के दौरान तीन थोक दवा विक्रेताओं के पास नशे में उपयोग होने वाली कफ सीरप का अवैध स्टॉक मिला है। इसके रेकॉर्ड में गड़बड़ी मिलने पर तीनों कारोबारियों को औषधि विभाग ने नोटिस जारी किया। लेकिन, कारोबारी दवा रेकॉर्ड में गड़बड़ी को लेकर संतोषजनक जानकारी नहीं दे सके। इस पर तीनों के दवा कारोबार का लाइसेंस निलम्बित कर दिया गया है।
घूम रही शक की सुई
प्रशासन की कार्रवाई के शिकंजे में फंसी तीनों थोक दवा दुकानें मुख्य बाजार से बाहर हैं। इसमें दो कारोबारी जिन क्षेत्रों में थोक दुकान संचालित कर रहे हैं, इसके आसपास क्षेत्रों में नशे के लिए दवा बेचते कई लोग पहले पकड़े जा चुके हैं। उनके कब्जे से नशे में उपयोग की जाने वाली और प्रतिबंधित दवाइयां भी बरामद होती रहती हैं।
नहीं कस रहा शिकंजा
दवा कारोबार से जुड़े लोगों का मानना है कि सीरप की अवैध बिक्री नहीं होनी चाहिए। लेकिन, आमतौर पर अवैध स्टॉक पकड़े जाने पर सम्बंधित कारोबारी तक कार्रवाई थमकर रह जाती है। दवा बनाने वाली कंपनी प्रत्येक उत्पाद पर अपना बैच नम्बर दर्ज करती है। थोक कारोबारी हर दवा की खरीद-बिक्री का औषधि विभाग को ब्योरा भेजते हैं। खुदरा कारोबारी डॉक्टर की पर्ची के बिना ऐसी दवा नहीं बेच सकता। इसे खरीदने वाले का रेकॉर्ड रखना होता है। उसके बावजूद अवैध स्टॉक पकड़े जाने पर उसके आपूर्तिकर्ता और सम्बंधित दवा कंपनी तक कार्रवाई का शिकंजा नहीं सकता।
Published on:
13 Feb 2022 01:37 am
बड़ी खबरें
View Allजबलपुर
मध्य प्रदेश न्यूज़
ट्रेंडिंग
