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dussehra songs यहां देसी गीतों पर होती है देवी की भक्ति, सुनकर झूम उठेंगे आप

जबलपुर में सबसे ज्यादा देसी देवी गीतों की डिमांड होती है। इन दिनों बुंदेलखंडी देवी गीतों का बोल बाला है

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जबलपुर। संस्कारधानी जबलपुर का दशहरा देश में प्रसिद्ध है। नवरात्रों पर यहां पर जितनी धूम और भक्ति आस्था देखी जाती है वह प्रदेश में शायद ही कहीं देखने मिलती हो। यहां प्रतिपदा से दशहरा तक सुबह से रात तक देवी गीतों के जैकारे गुंजायमान होते रहते हैं। गली गली रंग बिरंगी रोशनी के साथ देवी पंडाल और देवी दरबार में भक्तों की भीड़ लगी रहती है। लाइटिंग ऐसी के अच्छे-अच्छों को आकर्षित कर दे। खासकर अन्य शहरों से आने वालों को यह शहर दशहरा में सबसे ज्यादा प्यारा लगता है। हम बात करते हैं देवी गीतों की जिनके माध्यम से देवी की भक्ति आस्था और उनके प्रति हम अपना भाव प्रकट करते हैं। वैसे तो राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी बड़ी कंपनियां देवी गीतों की कैसेट निकालती हैं। बड़े-बड़े कलाकार भी देवी गीत करते हैं, लेकिन जबलपुर में सबसे ज्यादा देसी देवी गीतों की डिमांड होती है। इन दिनों बुंदेलखंडी देवी गीतों का बोल बाला है। माई बड़ी खेरमाई की महिमा हो या माई शारदा की सभी देवी गीत स्थानीय कलाकारों द्वारा गाए गए।

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अंगना पधारो महारानी मोरी शारदा भवानी मैहर में बैठी भवानी मोरी शारदा भवानी मनीष अग्रवाल का यह गीत पिछले 1 साल से अभी चरम पर बना हुआ है। वही राकेश तिवारी की पारंपरिक गीतों की श्रंखला आज भी देवी पंडालों में गूंजती है। इनमे डूब चलो दिन माई डूब चलो दिन....सांझ भरी मंदिर में डूब चलो दिन..... माई मोरी खोलो किवड़िया द्वार खड़े तेरे दास.... पंडा को लग गई चुड़ेलन पंडा उसको फेरे.... ऐसे ही अनेक गीत जो कुछ साल पहले रिलीज हो चुके हैं। वह आज भी टॉप पर बने हुए हैं।

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इस साल भी दर्जनों कैसेट स्थानीय कलाकारों की रिलीज हुई है जो दुर्गा पंडालों पर सुनाई दे रहे हैं। यहां बॉलीवुड के फिल्मी देवी गीतों का चलन कम है। जबलपुर में ठेठ बुंदेली अंदाज में दशहरा मनाया जाना यह दर्शाता है कि यहां की जनता ने अपनी परंपरा बुंदेली और गोंड शासनकाल की परंपरा को जीवित रखा है। देवी गीत गायक अपने अलग ही अंदाज में इन देवी गीतों की तैयारी पूरे साल भर करते हैं। तब कहीं जाकर दशहरा में उनकी कैसेट रिलीज होती है जो जो वहां पर आते ही लोग घूमने जाते हैं।