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जबलपुर में मदन महल पहाड़ी पर बनेगा ईको टूरिज्म सेंटर

रानी दुर्गावती के शौर्य, संतुलित शिलाओं और शहर के ऑक्सीजन टैंक के रूप में पहचानी जाने वाली मदन महल पहाड़ी अब ईको टूरिज्म का केंद्र बनेगी। तीन ओर से रिहायशी इलाकों से घिरी होने से यहां योग केंद्र, साहसिक खेल सेंटर का विकास किया जाएगा।

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Madan Mahal hills

Madan Mahal hills

जबलपुर। रानी दुर्गावती के शौर्य, संतुलित शिलाओं और शहर के ऑक्सीजन टैंक के रूप में पहचानी जाने वाली मदन महल पहाड़ी अब ईको टूरिज्म का केंद्र बनेगी। तीन ओर से रिहायशी इलाकों से घिरी होने से यहां योग केंद्र, साहसिक खेल सेंटर का विकास किया जाएगा। इसके साथ ही पहाड़ी पर जू स्थापित करने के लिए भी सम्भावना तलाशी जा रही है। इससे पर्यटक एक ही बार में कई खूबसूरत स्थल देख सकेंगे।

डुमना में जू स्थापित करने को लेकर नगर निगम स्तर पर पहल हुई थी। फिर मामला विधानसभा स्तर पर भी उठा। लेकिन, वन्य जीवों की चहलकदमी के खतरे को देखते हुए डुमना में जू स्थापित करने को लेकर एयरपोर्ट अथारिटी की ओर से एनओसी नहीं मिली थी। अब शहर के बीचोंबीच मदन महल पहाड़ी और ठाकुरताल के बड़े हरित क्षेत्र को देखते हुए यहां जू स्थापित करने के लिए जिला प्रशासन, नगर निगम, वन विभाग मिलकर सम्भावना तलाश रहे हैं।

रोप वे निर्माण को मिल चुकी है स्वीकृति
मदन महल पहाड़ी पर संतुलित शिलाओं, शारदा मंदिर, मदन महल किला, शैलपर्ण, पिसनहारी की मढिय़ा, बाजनामठ से लेकर संग्रामसागर जैसे रमणीय स्थल हैं। पहाड़ी पर ईको टूरिज्म केंद्र, एडवेंचर स्पोट््र्स से लेकर अन्य केंद्र विकसित किए जाने के कारण एक ही रूट पर ये सभी पर्यटन स्थल आ जाएंगे। इसके लिए पहाड़ी पर रोपवे का निर्माण स्वीकृत किया जा चुका है।

शहर के बीच बड़ा हरित क्षेत्र
मदन महल पहाड़ी व ठाकुरताल में शहर के बीचोंबीच बड़ा हरित क्षेत्र है। इस क्षेत्र में तेंदुआ, चीतल, मोर, वाइल्ड बोर, सेही, खरगोश, सियार भी हैं। पहाड़ी पर प्राकृतिक कॉरिडोर में ये वन्य जीव विचरण करते हैं।

मदन महल पहाड़ी को साहसिक खेल और ईको टूरिज्म सेंटर के रूप में विकसित किया जाएगा। इसके लिए नगर निगम, पर्यटन विकास निगम, राजस्व विभाग, वन विभाग मिलकर काम करेंगे। बड़े हरित क्षेत्र को देखते हुए यहां जू स्थापित करने को लेकर भी सम्भावना तलाशी जा रही है।
बी. चंद्रशेखर, सम्भागायुक्त

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