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Education story: करोड़ों का शिक्षा उपकर, फिर भी शिक्षकों और सुविधाएं गायब

Education story: करोड़ों का शिक्षा उपकर, फिर भी शिक्षकों और सुविधाएं गायब

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Education story

जबलपुर। शिक्षा उपकर के नाम पर शहरवासियों से हर साल करोड़ों रुपए टैक्स वसूलने के बाद भी स्कूलों को अपडेट करने और छात्र-छात्राओं को बेहतर शिक्षा मुहैया कराना तो दूर नगर निगम के स्कूलों में पर्याप्त शिक्षक भी नहीं हैं। अतिथि शिक्षकों की भर्ती भी समय पर नहीं हो पा रही है। इसका असर छात्र-छात्राओं की शिक्षा पर भी पड़ रहा है।छात्रों को खेल सुविधाएं मुहैया कराने, स्कूलों को मॉडल, एक्सीलेंस बनाने या सीबीएससी बोर्ड का पाठ्यक्रम शुरू करने की पहल भी नहीं हो रही है।

स्कूलों के हाल बेहाल: इंफ्रास्ट्रक्चर विकास के नाम पर नहीं हो रहा कोई नया काम

नगर निगम प्रशासन पांच स्कूलों का संचालन करता है। इनमें पहली से बारहवीं कक्षा तक के छात्र हैं। इन स्कूलों में शिक्षकों के 55 पद स्वीकृत हैं। इनमें से 10 नियमित शिक्षक बचे हैं। 45 अतिथि शिक्षकों से अध्यापन कार्य कराया जा रहा है। नया शैक्षणिक सत्र शुरू हुए दो माह होने के हैं, लेकिन अभी तक अतिथि शिक्षकों के चयन की प्रक्रिया अधूरी है। अतिथि शिक्षकों की स्वीकृति की फाइल निगम प्रशासन के पास अटकी हुई है।

IMAGE CREDIT: patrika

वर्षवार जमा उपकर
₹9.78- 2015-16
₹12.02- 2016-17
₹13.35- 2017-18
₹14.11 - 2018-19
₹18.20 - 2019-20
₹20.12 - 2020-21

विकास के नाम पर हुए काम
पिछले चार साल में निगम के शिक्षा विभाग ने जर्जर भवनों का नए सिरे से निर्माण कराया है। वित्तीय वर्ष 2016-17 में 8 करोड़ 98 लाख की लागत से स्कूलों की मरम्मत, रंगाई-पुताई व नए निर्माण कार्य कराए हैं। दमोहनाका स्थित संस्कृत महाविद्यालय भवन में 1 करोड़ 34 लाख रुपए से विकास कार्य जारी है, जो चार साल बाद भी पूरा नहीं हो सका है। गुलौआ चौक स्थित कछपुरा स्कूल भवन का नया निर्माण 1 करोड़ 25 लाख, सुभाष नगर स्कूल भवन का निर्माण 1 करोड़ 96 लाख से कराया गया है। डॉ राजेंद्र प्रसाद स्कूल भवन ग्वारीघाट का निर्माण 8 लाख 42 हजार रुपए की लागत से कराया गया है। इसके अलावा 4 जोनों के स्कूलों में 30 लाख से कम्प्यूटर लगाए गए।

राशि (करोड़ रुपए में)
एमआइसी गठित होते ही नगर निगम के स्कूलों में शिक्षा व्यवस्था सहित आवश्यक इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करेंगे। शिक्षा और चिकित्सा व्यवस्था में सुधार सर्वोच्च प्राथमिकता में शामिल होगा।
- जगत बहादुर सिंह अन्नू, महापौर