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दिल्ली से आए इंजीनियर का टैम्प्रेचर लेकर डॉक्टरों ने कहा- सब ठीक है घर जाओ, बाद में पूरा परिवार कोरोना संक्रमित मिला

- एप्रोच लगाने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने कराई कोविड जांच

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Coronavirus

जबलपुर. कोरोना संक्रमण को लेकर सरकारी अस्पतालों की लापरवाही फिर उजागर हुई है। मामला नई दिल्ली से आए 36 वर्षीय इंजीनियर का है। विक्टोरिया अस्पताल में उपचारत कोरोना संक्रमित इंजीनियर की आपबीती से जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था सवालों के घेरे में है। इंजीनियर को दिल्ली से आने के अगले दिन ही बुखार आया। वह जांच के लिए मेडिकल कॉलेज गया। दो बार जाने और ट्रेवल हिस्ट्री बताने पर भी डॉक्टरों ने जांच के बाद बुखार नहीं होने की बात कहकर लौटा दिया। बुखार बना रहने पर अगले दिन वह विक्टोरिया गया। वहां भी डॉक्टरों ने वैसा ही बर्ताव रखा। परेशान होकर इंजीनियन ने समाजसेवी से मदद मांगी। दोबारा जाने पर विक्टोरिया अस्पताल में नमूने लेकर घर भेज दिया गया। करीब एक सप्ताह बाद रिपोर्ट आई, तो वह कोविड-19 पॉजिटिव निकला। उसके सम्पर्क में आकर परिवार के और सात सदस्य भी बाद में कोरोना संक्रमित मिले।

फ्लाइट से आया
इंजीनियर नई दिल्ली से फ्लाइट से 30 मई को शहर आया था। 31 मई को बुखार महसूस हुआ, तो वह मेडिकल गया। जांच से संतुष्ट नहीं होने पर एक जून को विक्टोरिया गया। बाद में तत्कालीन सीएमएचओ से एप्रोच करने पर उसे दोबारा अस्पताल बुलाया गया। पांच जून को नमूने लेकर जांच के लिए भेजे गए। आठ जून को रिपोर्ट पॉजीटिव आई। उसके बाद एक के बाद एक परिवार के सात और सदस्य जांच में संक्रमित मिले। इसमें एक हाई रिस्क के दो मरीज हैं। इसमें 61 वर्षीय डायबिटीक और एक साल की बच्ची शामिल है।

घर में 100, अस्पताल में 96 प्वाइंट
फ्लाइट से आए इंजीनियर की नई दिल्ली और डुमना एयरपोर्ट पर थर्मल स्क्रीनिंग हुई। उसके शरीर का तापमान सामान्य पाया गया। फिर भी एक फॉर्म भराया गया। घर जाकर स्वास्थ्य में परेशानी होने पर अस्पताल जाकर जांच कराने के लिए कहा गया। घर पहुंचने के बाद उसे बुखार आया। 31 मई को मेडिकल और एक जून को विक्टोरिया अस्पताल जाने पर थर्मल स्कैनर से उसका ट्रैम्प्रेचर लिया गया तो 95-96 प्वाइंट रेकॉर्ड हुआ। दोनों ही बार जब उसने घर जाकर डिजीटल थर्मामीटर से जांच की तो तापमान 100 प्वाइंट-फाोनहाइट आया।

लापरवाही
- बुखार और ट्रैवल हिस्ट्री होने पर भी जांच में ढिलाई।
- बुखार के साथ खरांश होने पर भी नमूने लेने में देरी।
- ट्रैवल हिस्ट्री होने के बावजूद संदिग्ध को क्वारंटीन नहीं किया।
- एप्रोच करने पर होम क्वारंटीन करने से पहले घर में इंतजाम नहीं देखा।
- नमूने लेने के बाद जांच रिपोर्ट आने में एक सप्ताह का समय लगना।

पॉजिटिव बढ़ते गए
8 जून- दिल्ली से लौटा इंजीनियर।
11 जून- इंजीनियर की सांस और ससुर।
12 जून- इंजीनियर की दो साली, बहनोई व एक अन्य सदस्य।
15 जून- परिवार में एक वर्षीय बच्ची।