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सौ वर्ष पुराने जिनालय पर भूकम्प का भी नही हुआ असर

गढ़ा स्थित श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन बड़ा मंदिर भी ऐसा ही जिनालय है, जो एक शताब्दी से अधिक प्राचीन है। यह जिनालय शहर के जैन समाज की अमूल्य धरोहर माना जाता है। इसका वास्तुशिल्प अनुपम है।

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गढ़ा स्थित श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन बड़ा मंदिर

पार्श्वनाथ भगवान की प्रतिमा है आस्था का केंद्र, गढ़ा के बड़ा जैन मंदिर में सेवा के प्रकल्प भी हैं संचालित

जबलपुर। संस्कारधानी को जैन धर्म का तीर्थ स्थल माना जाता है। यहां के प्राचीन जिनालयों के प्रति दिगम्बर जैन श्रावकों की प्रगाढ़ आस्था है। गढ़ा स्थित श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन बड़ा मंदिर भी ऐसा ही जिनालय है, जो एक शताब्दी से अधिक प्राचीन है। यह जिनालय शहर के जैन समाज की अमूल्य धरोहर माना जाता है। इसका वास्तुशिल्प अनुपम है। यह इतना मजबूत है कि 1992 में आए विनाशकारी भूकंप के दौरान आसपास बहुत क्षति हुई, लेकिन मन्दिर का बाल भी बांका नही हुआ। सेवाभावी जैन समाज जिनालय परिसर में धर्मशाला व चिकित्सा केंद्र भी चला रहा है।
होता है अलौकिक ऊर्जा का संचार-
जिनालय के नीरज जैन नारद ने बताया कि मंदिर में तीन वेदियां हैं । सभी वेदियों
में मूल नायक श्री पार्श्वनाथ भगवान विराजमान है। मुख्य वेदी के गर्भ ग्रह में शुद्ध वस्त्र
धारण कर कदम रखते ही अलौकिक शक्ति और ऊर्जा का संचार होता है । यहां प्रतिवर्ष श्रावण शुक्ल सप्तमी के दिन भगवान पार्श्वनाथ का मोक्ष कल्याणक उत्साह के साथ मनाया जाता है । मंदिर में क्षेत्रपाल जी की प्रतिमा का भी विशेष महत्व है । पर्यूषण पर्व की अष्टमी को यहां दूर-दूर से भक्त लोग आकर क्षेत्रपाल जी की पूजा करते हैं एवं अपनी कार्य सिद्धि की मनोकामना भी करते हैं।

फिजियोथेरेपी सेंटर है लोकप्रिय-
यहां धर्मशाला भी संचालित है। धर्मशाला परिसर में यहां के जैन समाज द्वारा कोरोना काल में निशुल्क क्वॉरेंटाइन सेंटर का
सफलतम संचालन किया गया था। यहां समय-समय पर यहां निशुल्क स्वास्थ्य शिविर का आयोजन भी किया जाता है। वर्तमान में यहां जैन समाज के द्वारा लोकहित के लिए नाम मात्र शुल्क पर फिजियोथैरेपी सेंटर का सफल संचालन किया जा रहा है। यह सेंटर आसपास के इलाके में खासा लोकप्रिय है। चातुर्मास में यहां आर्यिकारत्न आदर्शमति माताजी की संघस्थ आर्यिका माताजी उद्योतमति माताजी ससंघ विराजमान है।