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लाली कोष्टा@जबलपुर। मप्र का हर जिला वैसे तो अपने आप में अलग ही जैव विविधताओं के लिए जाना जाता है, लेकिन जबलपुर इनमें सबसे खास माना जाता है। प्राणी विज्ञान को जानने वालों व इसका अध्ययन करने वालों के लिए यह किसी जन्नत से कम नहीं कहा जाता है। यहां पाई जाने वाली कीट पतंगों की प्रजातियां दुर्लभ मानी जाती हैं। खासकर तितलियों की बात करें तो यहां 41 प्रजातियां देखी गई हैं। जो प्रदेश में अपना अलग स्थान रखती हैं। हाल ही में गवर्नमेंट साइंस कॉलेज जबलपुर के छात्रों ने एक दुर्लभ प्रजाति की तितली खोज निकाली है। जिसकी चर्चा इन दिनों प्राणी शास्त्र की पढ़ाई व जैव विविधता में रुचि रखने वालों के बीच हो रही है।
प्राणी शास्त्र विभाग की असिस्टेंट प्रो. डॉ. प्रीति खरे ने बताया कि इन दिनों प्राणी शास्त्र विभाग के एमएससी प्रथम वर्ष के छात्रों द्वारा आसपास के क्षेत्र में प्रयोगिक सर्वेक्षण कराया जा रहा है। फस्र्ट ईयर के स्टूडेंट सक्षम पटेल, रोहित और रामा ने कॉलेज के बॉटनिकल गार्डन में तितली की नई प्रजाति खोज निकाली है। ये ऐप फ्लाई नामक तितली दुर्लभ प्रजाति की है, इसका लारवा मांसाहारी होता है। इस तितली की पहचान विषय विशेषज्ञ जगत फ्लोरा द्वारा की गई। उनके अनुसार यह दुर्लभ प्रजाति की तितली है, इसका औपचारिक विवरण जबलपुर जिले में दर्ज नहीं है।
डॉ प्रीती खरे के निर्देशन में यह प्रायोगिक सर्वेक्षण कराया जा रहा था। प्राणी शास्त्र विभाग एचओडी डॉ सुनीता शर्मा के अनुसार साल 2015 में छात्र विवेक शर्मा द्वारा भी दुर्लभ प्रजाति की पेंट ब्रश स्विफ्ट तितली देखी गईं थी, जो जबलपुर में प्रथम बार दर्ज की जाने वाली तितली थी। शासकीय विज्ञान महाविद्यालय के प्राणी शास्त्र विभाग द्वारा जबलपुर नगर निगम के लोक जैव विविधता पंजी निर्माण कार्य भी किया जा रहा है।
जबलपुर के जंगल जैव विविधता की यूनिवर्सिटी
प्राणी शास्त्र विभाग की असिस्टेंट प्रो. डॉ. प्रीति खरे ने बताया कि जबलपुर के जंगल, पहाड़, नदियों को जैव विविधता की यूनिवर्सिटी कहा जाए तो अतिश्योक्ति नहीं होगी। क्योंकि जैव विविधता के लिए जबलपुर एक महत्वपूर्ण जिला माना जाता है। यही वजह है कि यहां टीएफआरआई, एफआरआई के मुख्यालय बनाए गए हैं। जैव विविधता से जुड़े अधिकतर युवा और वैज्ञानिक जबलपुर के जंगलों व आसपास के इलाकों में अध्ययन करने आते रहते हैं।
कहां कितनी प्रजाति की तितलियां
प्राणी शास्त्र विभाग की असिस्टेंट प्रो. डॉ. प्रीति खरे के अनुसार जबलपुर में जनवरी 2008 से 2018 तक अध्ययन किया गया। जिसमें तितलियों की 41 नई प्रजातियों तथा प्रदेश के लिए कुल 112 प्रजातियों की तितलियों को दर्ज किया गया था। जिनमें 42 प्रजातियां बहुत सामान्य थीं, पांच कभी कभार मिलने वाली, 18 दुर्लभ और 4 अतिदुर्लभ तितलियां थीं। दर्ज की गई प्रजातियों की लगभग छह प्रजातियां भारतीय वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की सुरक्षा श्रेणी के अंतर्गत आती हैं।
Published on:
17 Dec 2021 11:13 am

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