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भाइयो-बहनो में हूं आपका दोस्त अमीन सयानी…शांत हो गई रेडियो की ये मखमली आवाज

प्रसिद्ध रेडियो एंकर अमीन सयानी का निधन, जबलपुर में आज भी हैं चाहने वाले

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ameen sayani voice

Amen Sayan-Former radio announcer

जबलपुर. गुजरे जमाने के प्रसिद्ध रेडियो एंकर अमीन सयानी का हार्ट अटैक आने से 91 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनकी आवाज ही उनकी पहचान रही है। 7 दशकों से ज्यादा समय तक वे ऑल इंडिया रेडियो के सबसे अच्छे एंकर रहे। उनके द्वारा बोले जाने वाले शब्द भाइयो और बहनों आज भी लोगों के जहन में गूंजता है। संस्कारधानी में उनके चाहने वाले आज भी मौजूद हैं। सयानी के स्वर्गवास की खबर पाकर संगीत जगत से जुड़े लोग उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित कर रहे हैं।

54 हजार कार्यक्रम देने का रिकॉर्ड
वरिष्ठ साहित्यकार पंकज स्वामी के अनुसार ने अपने कॅरियर की शुरुआत में अंग्रेजी ब्रॉडकास्टर के रूप रूप में की थी, लेकिन आजादी के बाद जब हिन्दी रेडियो का चलन बढ़ा तो वे भी इस ओर आ गए। वे देश के इकलौते ऐसे रेडियो एंकर रहे हैं जिन्होंने किसी एक रेडियो के लिए 54 हजार से ज्यादा कार्यक्रम प्रस्तुत किए और उन्हें अपनी आवाज दी। इसके अलावा 19 हजार से अधिक जिंगल्स गाए व कई प्रसिद्ध टीवी पर प्रसारित होने वाले सीरियल्स, फिल्मों में भी बैकग्राउंड में आवाज दी है।

विविध भारती पर प्रसारित होने वाले गीतमाला कार्यक्रम ने उन्हें प्रसिद्धि दिलाई। गीत माला का प्रसारण 1952 में शुरू हुआ, तब से वही इसके मुख्य एंकर रहे। उनके बोलने के अनोखे अंदाज ने इस कार्यक्रम को नंबर वन शो बना दिया था। गीत माला 1952 से 1994 तक लगातार प्रसारित होता रहा। इसके बाद कुछ बदलावों के साथ इसे 2000 से 2003 के बीच पुन: प्रसारित किया गया, जिसे युवा पीढ़ी ने भी खूब पसंद किया।

मेरे फेवरेट एंकर रहे
अमीन सयानी की आवाज सुनना ही बहुत अच्छा लगता था। हमारे स्कूलों के दिनों में रेडियो ही एकमात्र मनोरंजन का साधन हुआ करता था। उस पर गीतमाला ऐसा प्रोग्राम होता था जो बच्चों और युवाओं से लेकर बुजुर्गों तक का पसंदीदा कार्यक्रम होता था। सयानी का भाइयो बहनों कहने का अंदाज आ भी याद आता है।
- इंद्रेश दुबे

हमारे घर जब रेडियो आया तो सबसे पसंदीदा कार्यक्रम गीत माला हुआ करता था। पूरा परिवार उसे सुनता था। खासकर गीतों के बीच-बीच में एंकर अमीन सयानी की आवाज और प्रस्तुतिकरण बहुत अच्छा लगता है। वे फिल्मी जगत का परिचय जिस अंदाज में देते थे, वो दूसरा कोई नहीं कर पाया।
- राजेश गुप्ता