
famous kaali mandir of india
जबलपुर। शहर के दुर्गा और काली मंदिरों में आमनपुर स्थित कालीमठ की बात ही अलग है। कालीमठ मंदिर की विशेषता यह है कि यहां माता की मूर्ति की स्थापना गोह (तलघर) में की गयी है- गोह में रहने के कारण इन्हें माता गोहकाली कहा जाता है। गोहकाली माता के दर्शन भी दुर्लभ हैं। इनके कपाट हमेशा नहीं खुले रहते बल्कि साल में केवल पांच बार ही पट खोले जाते हैं। नवरात्र पंचमी से श्रद्घालुओं को मां गोहकाली के दर्शन होंगे। चैत्र नवरात्र की पंचमी से नवमीं तक मां के पट दर्शन के लिए खुले रहेंगे।
विशेष पूजन पाठ
मंदिर के स्वयंसेवकों ने बताया कि गुरुवार को सुबह 6 बजे गोहकाली मां के पट खोले गए और यहां भक्तों की गहमागहमी बनी हुयी है। यहां विशेष पूजन पाठ किया जा रहा है। गौरतलब है कि गोहकाली मातारानी के पट साल में केवल पांच बार ही खोले जाते हैं। चैत्र नवरात्र के साथ ही शारदेय नवरात्र पर कपाट खोले जाते हैं। इसके साथ ही साल में पडऩेवाली दोनों गुप्त नवरात्र पर भी पट खोले जाते हैं। इसके अलावा माता के प्रकटोत्सव के अवसर पर भक्तों के दर्शनार्थ पट खोले जाते हैं। नवरात्र में अब सुबह 8 से 10 बजे व शाम 6 बजे से 9 बजे तक मां गोहकाली के दर्शन के लिए पट खोले जाएंगे।
चैत्र नवरात्र की पंचमी पर गुरुवार को स्कन्द माता का पूजन किया जा रहा है। शहर के पास के प्रसिद्ध सिद्धस्थान तेवर के त्रिपुर सुंदरी माता मंदिर, बड़ी खेरमाई, बूढ़ी खेरमाई मंदिर, सिविक सेंटर के बगलामुखी सिद्घपीठ में सुबह से ही श्रद्घालुओं की भीड़ है। पंचमी पर त्रिपुर सुंदरी माता मंदिर में ध्वज चढ़ाने की परंपरा है। गुरुवार को बड़ी संख्या में श्रद्घालु यहां ध्वज चढ़ाने पहुंच रहे हैं। सैकड़ों भक्तों की टोलियां यहां पहुंचकर माता को ध्वज चढ़ातीं हैं। अनेक श्रद्घालु मन्नत पूरी होने पर मातारानी को ध्वज अर्पित करते हैं।
Published on:
22 Mar 2018 09:37 am
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