
अन्नदाता
जबलपुर. मध्य प्रदेश में करीब 70 फीसदी किसान सीमांत एवं लघु किसान है। इन किसानों के पास बेहद सीमित खेती होने के कारण इनकी जीविका पर भी संकट रहता है। कम जमीन में यदि मौसमी फसल खराब हो जाती थी तो किसानों के पास कोई दूसरा रास्ता नहीं होता। हाल ही में कृषि विश्वविद्यालय के विकसित मॉडल ने ऐसे किसानों के लिए संजीवनी दी है। लघु और सीमांत किसानों के लिए यह मॉडल लाभदायक साबित हो सकेगा। इस मॉडल की जानकारी लेने के लिए प्रदेश के जिलों से किसानों के अलावा खेती का शौक रखने वाले लोग भी विवि पहुंच रहे हैं, वे सीमित जगह में मल्टी क्राफ्ट जैविक फसले उगाने के गुर जान रहे हैं।
20 मल्टी क्राफ्ट एक जगह
कृषि विवि ने कृषि प्रक्षेत्र के तहत एक एकड़ से भी कम क्षेत्र में विकसित मॉडल में करीब 20 मल्टी क्राफ्ट को एक साथ तैयार किया गया है। कापू, गोबर की खाद एवं जवाहर जैव उर्वरक से तैयार किए गए माध्यम में अरहर के पौधों को रोपित किए जाते हैं। लाख एवं अरहर की सामान्य फसलों के साथ ही प्याज, हल्दी, अदरक, लहसुन, टमाटर, धनिया, मिर्ची की फसल को लगाकर पैदावार बढ़ाई जा सकती है। एकसाथ दो से तीन फसलें किसान हर माह ले सकता है।
देश में खेती का रकबा बढ़ाने में मददगार
आधुनिक तकनीक के माध्यम से बोरों में मिट्टी भरकर खेती की जाती है। इस तकनीक से कम या अधिक जल के बावजूद पथरीली रेतीली और बंजर-उसर भूमि में भी सफलतापूर्वक खेती की जा सकती है। यह तकनीक देश में खेती का रकबा बढ़ाने और किसानों की आय को दोगुना करने में सार्थक होगी।
चार गुनी पैदावार
मात्र 60 किलोग्राम मिट्टी से भरी बोरियों में ही पोषक तत्व, जवाहर जैव उवर्रक, गोबर, खाद, केंचुआ खाद का स्पेशल ट्रीटमेंट दिया जाता है। सामान्य तकनीक से एक पौधे से अरहर 500 ग्राम पैदावार होती है। इस तकनीक से 2 किलोग्राम अर्थात 4 गुनी पैदावार होगी। इसके अलावा 600 ग्राम लाख एवं 5 किलोग्राम जलाउ लकड़ी प्राप्त की जा सकेगी।
छोटे किसानों के लिए यह मॉडल वरदान साबित होगा। इस मॉडल में एक साथ कई मल्टीक्राफ्ट फसलें तैयार की जा सकेंगी। इसका सफल प्रयोग विवि में किया गया है। अब इसे प्रदेश के किसानों के लिए उपलब्ध कराया गया है।
डॉ. मोनी थॉमस, प्रधान कृषि वैज्ञानिक
विवि का जवाहर मॉडल किसानों के लिए एक तरह से एटीएम साबित होगा। इससे देश में कम होती खेती के रकबे को बढ़ाया जा सकेगा। किसानों की आय दोगुनी करने को लेकर अब हम खेतों में किसानों के बीच इसका प्रदर्शन करने जा रहे हैं।
डॉ. पीके बिसेन, कुलपति कृषि विवि
Published on:
02 Dec 2019 09:09 am
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