
Arhar crop
जबलपुर। अरहर की फसल से दलहन उत्पादन के साथ लाख की खेती का भी फायदा हो रहा है। जंगल एवं राजस्व क्षेत्र के कुसुम, पलाश, खैर और बेर के पेड़ों पर लाख उत्पादन करने के साथ यह नया विकल्प सामने आया है। पश्चिम बंगाल के बलरामपुर एवं आसपास के क्षेत्रों में अरहर की फसल में लाख उत्पादन होता है। जबलपुर के कृषि जलवायु क्षेत्र में भी अरहर की फसल पर लाख के कीट लगाना फायदेमंद साबित हुआ है।
फसल पर रंगिनी लाख
लाख दो प्रकार का होता है। कुसम्ही लाख अच्छा होता है, जो कुसुम, खैर, बेर के पेड़ या सेमियालता की झाड़ी पर पैदा होता है। बाजार में कच्चे माल की कीमत 180 से 200 रुपए किलो है। जबकि, रंगिनी लाख परम्परागत तौर पर पलाश, बेर सहित अन्य पेड़ों से होता है। इसकी कीमत 130 से 140 रुपए प्रति किलो है। अरहर की फसल पर रंगिनी लाख का उत्पादन किया जा रहा है।
ऐसे होगा उत्पादन
लाख उत्पादन के लिए अरहर की बुवाई जुलाई में करनी चाहिए। फसल अच्छी होने पर नवम्बर में कीट लगाने चाहिए। फलियां तोडऩे और लाख निकालने के बाद भी अरहर फसल काटनी नहीं चाहिए, इसमें कतिकी और बैशाखी दोनों सीजन में लाख उत्पादन हो सकता है। मेड़ों पर बोई गई अरहर लाख उत्पादन में ज्यादा उपयोगी है। एक पौधे से एक से डेढ़ किलो अरहर एवं 300 से 400 ग्राम लाख प्राप्त किया जा सकता है।
प्रयोग सफल
राज्य वन अनुसंधान संस्थान पोलीपाथर में प्रयोग सफल हुआ। तकनीकी विशेषज्ञों ने तीन माह पहले अरहर की फसल पर लाख के कीट कैरिया लैका लगाए थे और उत्पादन की दर भी अच्छी मानी जा रही है। अरहर के 15 पौधों पर ट्रायल हो रहा है। पौधों से एक बार लाख की परत निकाली जा चुकी है। संस्थान के लाख विशेषज्ञ जबलपुर एवं आसपास के किसानों को अरहर की फसल में दोहरे फायदे लेने के लिए तकनीकी जानकारी देंगे। कुंडम में आदिवासियों का समूह पलाश के पेड़ों पर लाख पैदा कर रहा है। जबकि, लाख उत्पादन में मप्र का सिवनी पांचवें एवं बालाघाट छठवें स्थान पर है।
जीन बैंक में अरहर के 15 पौधों पर लाख कीट लगाए गए थे। प्रयोग सफल हुआ और पहली बार लाख निकाला गया है। अंतिम चक्र में लाख निकालने के बाद उत्पादन बता सकेंगे। अब किसानों के लिए अरहर दोहरा फायदा लेने का विकल्प है।
डॉ. प्रतिभा भटनागर, प्रिंसीपल इंवेस्टीगेटर, लाख प्रोजेक्ट
Published on:
05 Feb 2019 07:00 am
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