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पत्थर में खिले फूल: 15 एकड़ में लहलहाई सरसों, प्रदेश में बना मिसाल

पत्थर में खिले फूल: 15 एकड़ में लहलहाई सरसों, प्रदेश में बना मिसाल

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Flowers blooming in stone: Mustard growing in 15 acres stone land

Flowers blooming in stone: Mustard growing in 15 acres stone land

जबलपुर। पथरीली बंजर भूमि, जहां एक पौधा उगाना भी कठिन था, वहां एक किसान ने फूल खिला दिए। कड़ी मेहनत, उचित तकनीकी सलाह और सहयोग के चलते आज बंजर भूमि पर 15 एकड़ में सरसों की फसल लहलहाने लगी है। उपज भी बेहतरीन है। जिले के गंगई गांव में यह प्रयोग देखकर आसपास के किसान हैरत में हैं। जमीन मुरम, पत्थर, कंकड़ों से भरी-चरगवां रोड स्थित ग्राम घुघरी गंगई में जमीन पत्थर, मुरम और कंकड़ों से भरी है। इस कारण फसल उगा पाना कठिन था। किसान बल्देव होलानी ने कृषि विज्ञान केंद्र, तकनीकी सलाहकारों से चर्चा की और रिस्क लेकर काम शुरू किया। चार माह पूर्व नवंबर में शुरू किया प्रयास अब रंग लाया है।

बंजर भूमि को किसान ने बनाया उपजाऊ

6 से 7 क्विंटल की पैदावार
खेत का कार्य देख रहे अन्नी लाल पटेल ने बताया कि 15 एकड़ पथरीली जमीन में सरसों की खेती के लिए कृषि विश्वविद्यालय के बोर्ड मेम्बर, कृषि सलाहकार ब्रजेश अरजरिया के निर्देशन में नवंबर में काम शुरू किया। कुछ प्रयोग किए, सावधानी बरती गई, जमीन से पौधे निकलना शुरू हुए। मार्च में सरसों की फसल खड़ी हो गई। 6 से 7 क्विंटल की प्रति एकड़ पैदावार हुई है।

इस तरह किया उपाय
सरसों का हाइब्रीड सीड एचबीजे-7044 एसीएस प्रति एकड़ सवा किलो बीज नवंबर में बोया गया। 20 किलो डीएपी, 3 बोरी रॉक फ ास्फेट प्रति एकड़ बोनी के समय उपयोग किया। 25 दिन बाद में 25 किलो यूरिया और 3 किलो सल्फ र प्रति एकड़ डाला गया। साथ ही डीकम्पोजऱ का भी प्रयोग किया। इस बीच केवल 2 बार पानी दिया। प्रति एकड़ लगभग 4 से 5 हजार रुपए खर्च हुए।
नि:शुल्क प्राप्त कर सकते हैं सलाह

यदि तकनीकों को प्रयोग कर बेहतर तरीके से खेती की जाए तो बंजर जमीन भी उपजाऊ बन सकती है। सरसों की पैदावार बढ़ाकर खाद्यान तेल में भी हम आत्मनिर्भर हो सकते हैं। किसान नि:शुल्क सलाह और जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। उनका हर तरह से सहयोग किया जाएगा।
- डॉ. ब्रजेश अरजरिया, बोर्ड मेम्बर कृषि विवि एवं सलाहकार

पथरीली जमीन पर हुई पैदावार की जानकारी लगने पर हमने खुद जाकर फसल और जमीन को देखा। यह अपने तरह का प्रयोग है। अन्य किसान भी प्रेरित हों, हम इस पर काम करेंगे।
- डॉ. केके अग्रवाल, अध्यक्ष भारत कृषक समाज