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तीन विभागों से छीनी जमीन, ऑफिस के भवन गिरा दिए, बदले मे जगह देने में आनाकानी

वन विभाग ने मांगी 25 हजार वर्गफीट जमीन, कर्मचारियों के बनेंगे आवास  

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जबलपुर . राजा शंकर शाह और कुंवर रघुनाथ शाह के संग्रहालय व स्मारक निर्माण के लिए ली गई जमीन की क्षतिपूर्ति के बदले में जिला प्रशासन अभी तक वन विभाग को भूमि उपलब्ध नहीं करा पाया है। जबकि, प्रशासन ने कृषि विभाग, उद्यानिकी विभाग और वन विभाग से इस परियोजना के लिए जमीन ले ली है। बदले में वन विभाग जमीन पाने के लिए पत्राचार कर रहा है। विभाग ने 25 हजार वर्गफीट शासकीय या नजूल की भूमि मांगी है। इसका उपयोग वह अपने कर्मचारियों के आवास के निर्माण के लिए करेगा।

चल रहे थे दो विभागों के दफ्तार

एल्गिन अस्पताल के सामने संग्रहालय बनाया जा रहा है। इसका मुख्य भाग वन विभाग का भवन है। वहीं कृषि विभाग और उद्यानिकी विभाग का दफ्तर चलता था। लेकिन, संग्रहालय के निर्माण के कारण इन भवनों को तोड़ा गया है। केवल परियोजना के चिन्हित भवन को छोड़ा गया है। संग्रहालय और स्मारक का निर्माण शुरू हो गया है।

आवासों में रह रहे थे कर्मचारी

वन मंडल अधिकारी की तरफ से जिला प्रशासन को पत्र लिखा गया है। इसमें कहा गया है कि कृषि और किसान कल्याण विभाग को हस्तांतरित की गई भूमि पर उनके विभाग के कर्मचारी रह रहे थे। लेकिन अब इन्हें खाली करवाना पड़ा। इसके बदले ढाई हजार वर्गफीट जमीन मांगी गई है। कृषि विभाग संयुक्त संचालक कार्यालय अस्थाई रूप से कृषक प्रशिक्षण केंद्र अधारताल स्थानांतरित कर दिया गया है। जल्द ही उनका नया भवन वन मंडल अधिकारी कार्यालय परिसर में बनेगा। इसके लिए उन्हें 13 हजार वर्गफीट जमीन का आवंटन किया गया है। इसी तरह वन विभाग भी जमीन चाहता है। उद्यानिकी विभाग का दफ्तर अधारताल िस्थत रोपणी में भेज दिया गया है।

वीरगाथाओं को संजोएंगे

वन विभाग की जमीन पर राजा शंकरशाह और उनके पुत्र कुंवर रघुनाथ शाह के बलिदानों से भावी पीढ़ी को अवगत कराने एल्गिन हॉस्पिटल के सामने संग्रहालय और स्मारक का निर्माण चल रहा है। इसमें उनकी आजादी की अलख जगाने किए गए बलिदान और वीर गाथाओं को संजोकर रखा जाएगा। संग्रहालय में पांच गैलरियां बनाई जा रही हैं। राजा शंकर शाह और कुंवर रघुनाथ शाह से जुड़े वृत्तान्तों को अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर आडियो-वीडियो के माध्यम से इस संग्रहालय में प्रदर्शित किया जाएगा। इसका काम अभी चल रहा है। भवन की मरम्मत से लेकर उसे नया रूप दिया जा रहा है।