
yashwant sinha's hard statement on union budget
जबलपुर। एनडीए सरकार में केन्द्रीय वित्त मंत्री रहे यशवंत सिन्हा ने केन्द्रीय आम बजट पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने बजट को निराशाजनक व आंकड़ों की बाजीगरी निरूपित किया। सिन्हा ने कहा कि समस्याओं से जूझ रहे किसानों ने आम बजट से काफी उम्मीदें लगा रखी थीं, लेकिन निराशा ही उनके हिस्से में आई। इसे संतुलित बजट नहीं कहा जा सकता। सिन्हा यहां नरसिंहपुर सर्किट हाउस में पत्रकारों से चर्चा कर रहे थे। एक सवाल पर उन्होंने कहा कि किसानों को उपज का डेढ़ गुना मूल्य देने की बात भी बेमानी सी लग रही है। वित्त मंत्री जेटली ने इसमें कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी है कि इसे वे कैसे लागू करेंगे। सिन्हा यहां नरसिंहपुर में चल रहे किसान आंदोलन में शामिल होने आए हैं।
प्रॉवधान की जानकारी नहीं
पूर्व केन्द्रीय वित्त मंत्री सिन्हा ने कहा कि इस समय देश की सबसे बड़ी समस्या किसानों की बिगड़ती हुई स्थिति है। बजट की शुरूआत इसी से होनी थी, लेकिन वित्त मंत्री जेटली ने बजट भाषण की शुरूआत ही फॉरेन डॉयरेक्ट इन्वेस्टमेंट स्कीम से की। सिन्हा ने कटाक्ष करते हुए कहा कि वित्त मंत्री जेटली ने सदन में बैठकर बजट पेश किया। उन्हें बैठने से पहले मैडम आई एम सिट डाउन कहना था। जहां तक किसानों को उपज के डेढ़ गुना दाम देने की बात है तो इसमें योजना स्पष्ट नहीं है कि इसमें देश पर कितना भार आएगा। सरकार ने इसके लिए कितनी राशि का प्रॉवधान किया है। इसके इम्पलीमेंट को लेकर वित्तमंत्री जेटली ने केवल यह कह दिया कि इस संबंध में पहले नीति आयोग राज्य सरकारों के साथ विचार विमर्श करेगा। इसके बाद डेढ़ गुना दाम के लिए प्रक्रिया शुरू होगी। यह योजना कब तक लागू होगी? इसके लिए समय सीमा की बात कहीं दिखाई नहीं देती। उन्होंने इसे खरीफ की फसलों से लागू करने के लिए कहा है लेकिन फिलहाल यह बात बेमानी सी दिखाई दे रही है।
इन्कम टेक्स स्लैब नहीं बढ़ाया
पूर्व केन्द्रीय वित्त मंत्री ने कहा कि बजट से पूरा देश उम्मीद लगाए बैठा था कि इस बार इन्कम टेक्स स्लैब की सीमा बढ़ेगी। कर्मचारी वर्ग और मध्यम वर्ग को राहत मिलेगी लेकिन निराशा ही हाथ आयी। बजट में टेक्स एग्जिमशन लिमिट के लिए कुछ खास नहीं किया है। सरकार ने मार्केट के ऊपर प्रॉपर्टी गेन टेक्स लगाने की बात कही है। लोग सोच रहे थे कि नोट बंटी के बाद डगमगाए बाजार को बजट से कुछ राहत मिलेगी लेकिन ऐसी उम्मीद दिखायी नहीं दे रही है।
हार्टिकल्चर क्लस्टर पर ये बोले
सिन्हा ने जेटली के हार्टिकल्चर क्लस्टर प्लान पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि ये घोषणा हास्यास्पद है। जहां किसान बाग-बगीचे लगा रहे हैं। वहां पहले से ही क्लस्टर बने हुए हैं। उन्होंने व्यंग्यात्मक शैली में कहा कि अब यदि आम के बगीचे के बगल में कोई किसान धान लगाएगा तो सरकार उसे धान की जगह बाग लगाने के लिए प्रेरित करेगी? ऑपरेशन ग्रीन की बात भी समझ से परे लग रही है। इसमें वेयर हाउसिंग या फिर प्रोसेसिंग आदि को लेकर कोई स्पष्ट रुख नजर नहीं आता।
हेल्थ प्रोटेक्शन कैसे
पूर्वू केन्द्रीय वित्त मंत्री ने कहा कि जेटली बजट में दुनिया की सबसे बड़ी हेल्थ प्रोटेक्शन स्कीम ला रहे हैं। इसमें १० करोड़ परिवारों को शामिल करने की बात कही है। सीधी सी बात है कि इस स्कीम से ५० करोड लोग लाभान्वित होंगे। हैरानी बात है कि योजना के संबध में बजट में किसी स्पष्ट नीति की जानकारी नहीं दी गई। कुल मिलाकर बजट घोषणाओं का एक पुलिंदा समझ में आ रहा है। यह असंतुलित बजट है। इसमें इन्फ्रास्ट्रक्चर के विकास कोई खाका नजर नहीं आता। मिडिल क्लास को कोई राहत मिलती नहीं दिख रही है।
ये फायनेंसियल इंजीनियरिंग
पूर्व वित्त मंत्री ने जेटली के बजट को फायनेंसियल इंजीनियरिंग निरूपित किया। उन्होंने कहा कि सरकार ने इस साल राजकोषीय घाटा ३.२ प्रतिशत रहेगा। अब कह रहे हैं कि यह ३.५ प्रतिशत हो जाएगा। वर्ष २०१९ के लिए इसे ३.३ प्रतिशत बताया जा रहा है। इससे आम आदमी को कोई लेना देना नहीं है। ये केवल आंकड़ों की बाजीगरी नजर आ रही है।
Updated on:
02 Feb 2018 11:49 am
Published on:
01 Feb 2018 04:02 pm
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