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इस देसी वाटर पार्क में बच्चे बन रहे गजब के तैराक- देखें वीडियो

इस देसी वाटर पार्क में बच्चे बन रहे गजब के तैराक- देखें वीडियो

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Got into the sunar river watermelon Melon Why the Crop Flown

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जबलपुर। गर्मियों की छुट्टियां पड़ चुकी हैं। बच्चे अपने नाना नानी और दादा दादी के घर जा रहे हैं। गांवों में जाकर जीवन को करीब से देखने का मौका केवल गर्मी में ही मिलता है। वहीं शहर में गर्मी को एंजॉए करने का सबसे अच्छा जरिया वाटर पार्क है। लेकिन यहां प्रवेश करने के लिए महंगी टिकट लेनी होती है। फिर समय पर बाहर भी आना होता है। किंतु गांव के बच्चे एक बार जो देसी वाटर पार्क में जाते हैं, तो फिर कोई समय सीमा नहीं होती बाहर आने की। ये यहां न केवल पानी में मस्ती करते हैं, बल्कि तैराकी भी सीख जाते हैं। जो जीवन रक्षक बनने के काम आती है। ऐसे ही नजारे इन दिनों शहर के आसपास के तालाबों व नहरों में देखने मिल रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि वर्तमान भौतिक वादी स्थितियों में शहर हो चाहे गांव के बच्चों को मोबाइल और कंप्यूटरगेम के इर्दगिर्द समेट दिया है। इस स्थिति के चलते बच्चे व युवा शारीरिक परिश्रम वाले खेलों से भी दूर होते जा रहे है। ऐसी स्थितियों में नहर का ठंडा पानी जहां खेतों की सिंचाई के लिए महत्वपूर्ण है वहीं कुछ गांवों में युवा व बच्चे इस माध्यम को तैराकी सीखने का अवसर मानकर सामूहिक रूप से उपयोग कर रहे है।

नहर के पानी में बच्चे ले रहे वाटरपार्क का लुत्फ

नरसिंहपुर-गर्मियों की छुटिटयों में ठंडे पानी में तैराकी के साथ मौजमस्ती करने लिए जहां शहरी बच्चों के लिए वाटरपार्क में जाना अच्छा लगता है। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में इसके विकल्प के तौर पर बच्चे तालाबों और नहरों में तैराकी कर उछलकूद मचाते हुए मस्ती करते हैं। ऐसा ही कुछ नजारा इन दिनों करेली के पास के कस्बे आमगांव बड़ा के नजदीक से होकर निकली सिमरिया की मुख्य नहर में देखने को मिल रहा है। यहां बच्चे नहर के बहते पानी में जलक्रीड़ा करते हुए वाटरपार्क का लुत्फ ले रहे है। गांव के वरिष्ठ और युवाओं की देखरेख में ये बच्चे यहां तैराकी के मौलिक गुर भी सीख रहे है।

यहां के राजदीप कुमार,सौरभ जाट,राजेश वंशकार,शिवम वंशकार,लखन जाटव,संदीप पटैल,शैलेंद्र कौरव,वीरेंद्र आदि लोगों ने बताया पुराने समय में गांव के कमोबेश सभी लोग तैरना जानते हैं। लेकि न तैराकी के लिए समुचित संसाधन और नदियों के सूख जाने के कारण पानी उपलब्धता कम होने के कारण ग्रामीण बच्चे धीरे-धीरे तैराकी भूलते जा रहे है। इन्होने बताया कि नहर में पानी आने से जो बच्चे तैरना नहीं जानते थे उनके लिए भी तैरना सिखा रहे हैं सुरक्षा की दृष्टि से हम यहां पर 50 बच्चों को तैरना सिखा रहे हैं।