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माखनलाल चतुर्वेदी के साथ लड़ी लड़ाई, काकोरी कांड में भी इनकी अहम भूमिका

इन्होंने काकोरी कांड में भी प्रमुख भूमिका निभाई। स्वतंत्रता आंदोलन में इनके सक्रिय योगदान को देखकर माखनलाल चतुर्वेदी ने ठाकुर उपनाम प्रदान किया।

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Abha Sen

Aug 13, 2016

tiranga

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नरसिंहपुर। आज की पीढ़ी भले ही स्वंत्रतता संग्राम के सेनानियों को भूलते जा रही है, लेकिन देश की आजादी के लिए उनका किए गए त्याग और संघर्ष को सुनकर हमें गौरव की अनुभूति होती है। साथ ही यह पता चलता है कि देश को आजाद कराने के लिए स्वतंत्रता सेनानियों ने कितना बलिदान दिया है। उक्त बात जिले के स्वतंत्रता सेनानी ठाकुर निरंजन सिंह के परिजनों ने कही।

काकोरी कांड में भी योगदान देनेवाले सेनानी निरंजनसिंह के परिजनों में सबसे बड़ी बेटी दिप्ती प्रभा के पुत्र अजितेन्द्र नारोलिया, अमितेन्द्र नारोलिया, उजाला और सुनीता नारोलिया ने बताया कि निरजंन सिंह ने लेखनी की दुनिया में भी सक्रिय भूमिका निभाई। स्वतंत्रता सेनानी ठाकुर निरजंन सिंह का जन्म साल 1905 में जिले के बहोरीपार में हुआ। ये जब खंडवा में ग्रेजुएशन करने गए तभी माखनलाल चतुर्वेदी के सानिध्य में स्वतंत्रता आंदोलन में कूद पड़े। आगरा में एमएलबी की पढ़ाई के दौरान भी आंदोलन में लगातार सक्रिय रहे। इस दौरान वे आगरा के जिला कांग्रेस कमेटी के मंत्री रहे।

साल 1938-42 के दौरान कांग्रेस के जिला अध्यक्ष रहे। जेल में जाने के दौरान उनकी पत्नी ने दूसरी पुत्री को जन्म दिया, उस दौरान उनकी पत्नी की मौत हो गई। जेलर ने पत्नी को देखने जाने के लिए अनुमति मांगने को कहा तो इन्होंने मना कर दिया।


इन्होंने काकोरी कांड में भी प्रमुख भूमिका निभाई। स्वतंत्रता आंदोलन में इनके सक्रिय योगदान को देखकर माखनलाल चतुर्वेदी ने ठाकुर उपनाम प्रदान किया। तभी से इन्हें ठाकुर निरंजन सिंह कहा जाने लगा। जिले में पहला अखबार उदय निकाला तथा बाद में किसान का भी सम्पादन किया। सैनिक अखबार के उपसम्पादक रहे तथा कर्मवीर, प्रताप जैसे अखबारों में सहयोग किया।

बाद में आजादी के बाद 1946 में कांग्रेस की ओर से पहला विधायक बने। साल 1951 में विचारों में मतभेद के चलते कई लोगों के साथ प्रजा सोशलिस्ट पार्टी में चले गए और विधायक बने। 1958 तथा 1964 में राज्य सभा सदस्य भी रहे। इन्होंने जिले में शिक्षा के लिए चार शासकीय कॉलेज भी खुलवाया।

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