
gajrath mahotsav
जबलपुर। पंच कल्याणक प्रतिष्ठा एवं गजरथ महोत्सव में आस्था और उत्साह का संगम होगा। महोत्सव में श्वेत रंग यानि एरावत के रूप में हाथी पर सौधर्म इंद्र विराजमान होंगे और वे इंद्र-इंद्राणियों के साथ नगर भ्रमण करेंगे। गजरथ महोत्सव समिति के तत्वावधान में आचार्य विद्यासागर भवन चरहाई में मंगलवार दो दोपहर दो बजे पात्र चयन होगा। प्रथम तीर्थंकर आदिनाथ के माता-पिता, महामंडलेश्वर, मंडलेश्वर, कुबेर, इंद्र -इंद्राणियों का चयन होगा। उपयुक्त व्यक्ति का चयन पात्र के रूप में किया जाएगा और उन्हें महोत्सव में पूरी तरह से नियम-संयम का पालन करते हुए तपस्या करनी होगी।
श्री वर्णी गुरुकुल परिसर में धौलपुरी पत्थरों से निर्मित मंदिर पूर्ण हो गया है। इस मंदिर में राजस्थानी स्थापत्य कला की झलक दिख रही है। इसी मंदिर के पास सुमेरू पर्वत की 15 फुट ऊंची पांडुक शिला का निर्माण किया जा रहा है। इस शिला पर भगवान आदिनाथ के जन्म के समय 1008 कलश से अभिषेक किया जाएगा। देव रूपी समस्त इंद्रगण एवं भक्तगण अभिषेक करेंगे। सोमवार को समिति के अध्यक्ष अशोक जैन, प्रदीप जैन, सतीश जैन, संजय अरिहंत, सुरेंद्र जैन पहलवान, शैलेष आदिनाथ, नितिन बेंटिया, कमलेश जैन, रवि जैन, दिनेश जैन, मनीष जैन, जलज जैन, हेमंत जैन एवं मुन्ना जैन सोमवार को तैयारियों में जुटे थे।
भिंड से आएंगे प्रशिक्षित हाथी
श्री वर्णी गुरुकुल के ब्रह्मचारी नरेश भैया ने बताया, जिनालय में जैन धर्म के 20वें तीर्थंकर मुनि सुव्रत नाथ की प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा होगी। पंच कल्याणक महोत्सव में भगवान आदिनाथ की मूल क्रियाओं का जीवंत दर्शन होगा।
धर्मशास्त्र के अनुसार युग्र प्रवर्तक आदिनाथ के जन्म के बाद इंद्राणी बालक रूपी भगवान को इंद्राणी सौधर्म इंद्र को सौंपती हैं और इंद्र उन्हें लेकर सुमेरू पर्वत पर चले जाते हैं, जहां अभिषेक के बाद राज दरबार में उन्हें सौंपते हैं।
गजरथ के लिए उप्र के खमीर के हाथी वाहनों से लाए जाएंगे। ये प्रशिक्षित हाथी भिंड में आयोजित गजरथ महोत्सव से संस्कारधानी में आएंगे।
25 फीट चौड़ा गजपथ
गजरथ स्थल पर अयोध्या नगरी का ढांचा तैयार हो गया है। छह एकड़ के मैदान में 25 फुट चौड़ा गजपथ बनाया जा रहा है। इस पर रथ पर विराजमान भगवान आदिनाथ और गज चलेंगे। गजपथ पर बैरीकेडिंग की गई है।
पथ के दोनों ओर श्रद्धालु खड़े होकर धर्म प्रभावना के साक्षी बनेंगे। जबकि, जन्म कल्याण में अयोध्या नगरी हाथी पर विराजमान सौधर्मेद्र नगर भ्रमण करते हुए पांडुक शिला तक जाएंगे। जहां रत्नजडि़त कलशों से भगवान का जन्म अभिषेक
किया जाएगा।
एक हजार सुपात्र जोड़ों को मिलेगा अवसर
इंद्र इंद्राणी पात्र चयन में एक हजार सुपात्र जोड़ों को अवसर मिलेगा। गजरथ महोत्सव में धार्मिक भाव सम्पन्न जैन दम्पतियों पात्रता अर्जित करने को प्रयासरत हैं। प्रतिष्ठाचार्य ब्रह्मचारी विनय बंडा ने बताया, कल्याणक शब्द का अर्थ कल्याण करने वाला है। मोक्ष के कारणों प्रधान सम्यक दर्शन के आठ अंग माने गए हैं, जिनमें एक प्रभावना है। पंच कल्याणक से सभी वर्गों में धर्म के प्रति रूचि, आकर्षण व श्रद्धा बढ़ती है।
Published on:
12 Feb 2019 07:30 am
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