
ललितपुर में आस्था श्रद्धा के साथ मनाया गया गजरथ महोत्सव, बढ़ चढकर श्रद्धालुओं ने लिया हिस्सा
ललितपुर. दयोदय गौशाला मसौरा ललितपुर परिसर में संत शिरोमणि राष्ट्र संत आचार्य श्री विद्यासागर जी महामुनिराज ससंघ के सान्निध्य में चला। इस दौरान गजरथ महामहोत्सव में सोमवार को भगवान के गर्भकल्याणक के उत्तर रूप को आस्था श्रद्धा के साथ मनाया गया।
इंटरनेट का ज्यादा उपयोग घातक
दोपहर में सीमनन्तनी क्रिया के अंतर्गत भगवान की माता की गोद भराई की गई, जिसमें श्रद्धालुओं ने बढ़ चढ़कर के भाग लिया। इसके बाद सांस्कृतिक कार्यक्रमों के अंतर्गत नाटक प्रस्तुत किया गया। आचार्य की प्रेरणा से स्थापित प्रतिभा स्थली की बालिकाओं की प्रस्तुति को सभी ने मुक्तकंठ से सराहा। उन्होंने इंटरनेट के अति उपयोग से युवाओं के ग्रसित होने पर गहरी चिंता व्यक्त की गई।
पंचकल्याणक के गर्भकल्याणक के उत्तर रूप को बड़े ही सुंदर तरीके से दर्शाया गया। पात्रों के अभिनय को देखकर श्रद्धालु भाव विभोर हो जयकारा लगाने लगे। इस दौरान नाभिराय राजदरबार, स्वप्नफल कथन, अष्ट कुमारी देवियों द्वारा भगवान की माता की सेवा, छप्पन कुमारी देवियों द्वारा सप्रेम भेंट समर्पण के दृश्य पंचकल्याणक के पात्रों द्वारा प्रदर्शित किए गए। इस अवसर पर आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज ने अपने अमृत वचनों में जहां तीर्थकर के भव्य समवसरण के बारे में बताया वहीं गौरवशाली भारतीय संस्कृति से परिचित कराया।
भारत की सबसे बड़ी समस्या अपव्यय
आचार्य ने ललितपुर के अर्थ को बड़े ही सुंदर और रचनात्मक तरीके से प्रस्तुत किया। उनके कहे अनुसार हमारा ललितपुर लालित्य से परिपूर्ण, स्वाद को बताने वाला एक बेहद आवश्यक खाद्यान्न-लवण की तरह है। जिस तरह आटे में नमक डालने से उसका स्वाद अतिशययुक्त मिष्ठान जैसा हो जाता है, ठीक उसी प्रकार बुंदेलखंड में यह ललितपुर है।
आचार्य ने कहा कि सरकार का कहना है कि भारत की सबसे बड़ी समस्या गरीबी है, लेकिन भारत की सबसे बड़ी समस्या अपव्यय भी है। व्यक्ति के जीवन में कितना भी तूफान आये, समस्या आये उससे डरे नहीं। जिस प्रकार किसान अगले साल के लिए बीज सुरक्षित रख लेता है, उसी प्रकार हमें भी देश हित के लिए एक निश्चित राशि सुरक्षित रखना चाहिए और उसे देश हित में सरकार के मांगने से पहले दे देना चाहिए। हमारे यहां कहा गया है कि समीचीन रूप से अर्जित आय का एक प्रतिशत अतिथि के लिए रखना। अतिथि सरकार कहलाती है। सरकार का सहयोग करो।
इंडिया नहीं भारत बोलो
उन्होंने कहा कि अपने इतिहास को देखें। पहले क्या भारत था? अब इंडिया होता जा रहा है। इंडिया अलग वस्तु है और भारत अलग है। उन्नति वह कहलाती है जो ऊपर की ओर उठती है। लुप्त होती संस्कृति को हम उन्नति कैसे कहें।
इंडिया नहीं भारत बोलो, भारत को स्वीकारो, इंडिया को छोड़ो। लंदन के एक सम्मेलन का उल्लेख करते हुए आचार्य ने कहा जब से भारत में बिटिश गवर्मेंट आयी तब से भारतीय शिक्षा पद्धति का पतन हो गया है। भारत शब्द में एक ताकत है। इस देश के हर व्यक्ति का दिल इस शक्ति से गूंजना चाहिए।
Published on:
26 Nov 2018 06:56 pm

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