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500 साल पुराने मंदिर में विराजे हैं कल्चुरिकालीन गजानन, करते हैं मन्नतें पूरी

500 साल पुराने मंदिर में विराजे हैं कल्चुरिकालीन गजानन, करते हैं मन्नतें पूरी

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New Year 2025

ganesh chaturthi 2025 : संस्कारधानी के प्राचीन, ऐतिहासिक मंदिरों में भव्य और कल्चुरिकालीन प्रतिमाएं विराजमान हैं। सदर क्षेत्र स्थित ऐतिहासिक गणेश मंदिर में भी ऐसी ही मनोहारी कल्चुरिकालीन गणपति की प्रतिमा विराजित है। 500 साल पुराने इस मंदिर को क्षेत्र के लोग गजानन का सिद्धपीठ मानते हैं। वर्षों की परम्पा के अनुरूप इस साल भी अनंत चतुर्दशी पर गणपति विसर्जन के लिए निकालने जाने वाले सदर जुलूस की अगुवाई यह प्रतिमा करेगी। मंदिर में गजानन की पालकी सज रही है। गणेशोत्सव की तैयारियां जोरों पर हैं।



ganesh chaturthi 2025 : पालकी में ले जाते हैं

मंदिर की देखरेख करने वाले प्यारेलाल प्रजापति ने बताया कि गणेशोत्सव के समापन पर सदर बाजार में निकलने वाले जुलूस में हर साल सबसे आगे इसी गणेश मंदिर की प्रतिमा रहती है। पालकी में गजानन को ले जाया जाता है जो जुलूस का नेतृत्व करते हैं। उन्हें सलामी देकर पालकी में ले जाने के लिए क्षेत्र का प्रमुख गंगाराम उस्ताद अखाड़ा आता है। क्षेत्र के लोग यहां के गजानन को सदर का राजा कहते हैं।

ganesh chaturthi 2025 : गणेशोत्सव, गुरु पूर्णिमा पर धूम

प्रजापति ने बताया कि मंदिर में रोजाना सुबह-शाम पूजन और आरती होती है। मान्यता है कि यहां लोगों की मन्नतें पूरी होती हैं। प्रत्येक बुधवार को विशेष अनुष्ठान- पूजन होता है। गणेशोत्सव में दस दिन तक रात्रि में महिंलाओं के भजन होते हैं। मन्नत पूरी होने पर अनुष्ठान-हवन होते हैं। गुरु पूर्णिमा व गणेशोत्सव धूमधाम से मनाए जाते हैं।

ganesh chaturthi 2025 : 25 साल पहले हुआ जीर्णोद्धार

सदर की गली नंबर-16 में यह प्राचीन व ऐतिहासिक गणेश मंदिर स्थित है। मंदिर के संरक्षक प्रजापति ने बताया कि वे बचपन से मंदिर की देखरेख कर रहे हैं। उनके पूर्वजों ने मंदिर बनवाया था। उनके बुजुर्ग बताते हैं कि पहले यहां खप्परवाला मंदिर का भवन था। क्षेत्रीयजनों के सहयोग से 25 साल पहले मंदिर का जीर्णोद्धार किया गया। मूर्ति के लिए सिंहासन स्थापित किया गया।