
Ganesh utsav: इस बार भक्तों को दर्शन नहीं देंगे लालबाग के बादशाह, यह है बड़ी वजह
जबलपुर। प्रथम पूज्य भगवान गणेश की जय-जयकार हो रही है। संस्कारधानी भगवान गणपति की भक्ति में लीन है। कोरोना संकट के कारण नगर में इस बार पंडाल कम सजे हैं, परंतु हर घर में भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित की गई हैं। घरों से लेकर मंदिरों में गणपति का विशेष पूजन अनुष्ठान हो रहा है।
सिद्धेश्वर गणेश मंदिर, सिद्ध गणेश मंदिर ग्वारीघाट, गणेश मंदिर रामपुर, गणेश मंदिर हनुमानताल, गणेश मंदिर गंजीपुरा, गणेश मंदिर कुदवारी में सुबह से लेकर रात तक पूजन-अनुष्ठान जारी है। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच चंदन, धूप, कपूर से हर गली-मोहल्ला सुवासित है। अपनी मनोकामना पूर्ति के लिए गणेश मंदिरों में श्रद्धालु अर्जी लगाने भी पहुंच रहे हैं।
इस प्रकार पूजन
गणपति स्त्रोत, गणेश चालीसा पाठ, भगवान गणेश के द्वादश नामों का पाठ, दो पहर आरती, मंगलमूृर्ति के मंत्रों का जाप किया जा रहा है। घरों में भजन मंडली भजन-कीर्तन कर रही हैं। पूजन स्थलों में सभी प्रार्थना कर रहे हैं कि कोरोना महामारी समेत अन्य बीमारियों से मंगलमूर्ति मुक्ति दिलाएं और सभी के जीवन में खुशहाली आए।
दूर्वा का अर्पणमोदक का भोग
गणपति को सबसे प्रिय दूर्वा श्रद्धालु प्रतिदिन अर्पित कर रहे हैं। इसके साथ ही मोदक, लाल फू ल, मेवा, मौसमी फल का प्रसाद चढ़ाया जा रहा है। शहर के मंदिर व पंडालों में कोरोना प्रोटोकॉल का पालन करते हुए श्रद्धालु अनुष्ठान में शामिल हो रहे हैं।
भगवान लड्डू गणेश की महाआरती
श्री त्रिमूर्ति कला लड्डू गणेश मंदिर गोरखपुर में रविवार रात में महाआरती का आयोजन हुआ। महाआरती के दौरान संस्था के गुरुदयाल सिंग सैनी, कर्नल टीएन मेहता, बिहारी लाल साहू, गुलाब पटेल, प्रदीप सेठी, चांदमल महावर, सुरेश पासी, रवि शंकर पांडेय, अजय राजपूत, संतोष गुप्ता, गौरी शंकर पांडेय, रामेश्वर अग्रवाल, रवि भारद्वाज आदि उपस्थित थे।
भगवान गणेश विद्या व बुद्धि के देव
भगवान श्री गणेश विद्या व बुद्धि के देव हैं। विद्यार्थियों के लिए आदर्श व प्रेरक हैं जो लोग किसी भी कार्य के शुभारंभ में भगवान गणेश की प्रार्थना पूजन और दर्शन करते हैं उनके सभी कार्य निर्विघ्न संपन्न होते हैं। सभी पुराण, वेदों के लेखक भगवान गणेश हैं। उक्त उद्गार महंत रामबहादुर महाराज ने रविवार को श्री सिद्ध गणेश मंदिर में 10 दिवसीय गणपति जन्मोत्सव समारोह में दिए। उन्होंने कहा वेदव्यास बोलते थे और गणपति लेखन करते थे। उन्होंने बताया कि गणेशोत्सव के चौथे दिन भगवान के गजकर्ण स्वरूप का लाल वस्त्रों से शृंगार कर मेवों से सहस्रार्चन किया जाएगा।
Published on:
13 Sept 2021 06:51 pm
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