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garlic rate : बड़े दाने के लहसुन पर मुनाफाखोरी का ‘तमगा’, ऐसे बढ़ रहे भाव

garlic rate : रसोई के मसालों का राजा देसी लहसुन पर मुनाफाखोरी का तमगा लगाकर उससे कमाई का रास्ता निकाल लिया है।

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इस वर्ष गत वर्ष की तुलना में लहसुन का रकबा करीब 5500 हैक्टेयर बढ़ गया है। गत दो वर्ष से लहसुन के अच्छे भावो के चलते जिले में इस बार करीब 37 हजार 800 हैक्टेयर में किसानों ने लहसुन की बुवाई की है।

इस वर्ष गत वर्ष की तुलना में लहसुन का रकबा करीब 5500 हैक्टेयर बढ़ गया है। गत दो वर्ष से लहसुन के अच्छे भावो के चलते जिले में इस बार करीब 37 हजार 800 हैक्टेयर में किसानों ने लहसुन की बुवाई की है।

garlic rate : रसोई के मसालों का राजा देसी लहसुन पर मुनाफाखोरी का तमगा लगाकर उससे कमाई का रास्ता निकाल लिया है। इससे लहसुन के भाव आसमान छूने लगे हैं। लोगों की रसोई से लहसुन गायब होने लगा है। गृहणियों को लहसुन का पेस्ट खरीदने को मजबूर किया जा रहा है। शहर में पिछले दिनों ऐसे लहसुन की आवक की जांच में यह साफ हो गया है कि लहसुन की पैदावार असम में की गई थी, जिसे जाने-अनजाने में विदेशी लहसुन बना दिया गया था ताकि इसके तगड़े दाम मिल सके।

garlic rate : दाम बढ़ाने के रास्ते ढूढ़ निकाले

फास्ट फूड और चाइनीज व्यंजनों में लहसुन के बढ़ते चलन से बिचौलियों ने लहसुन के दाम बढ़ाने के रास्ते ढूढ़ निकाले हैं। इसमें बिचौलियों ने इसे दमदार, पौष्टिक बड़े दाने का बताकर मार्केट में उतार दिया है, जबकि यह हाइब्रीड प्रोडेक्ट है, जिससे यह लहसुन आम लहसुन से अलग दिखाई देता है और रंग में भी फर्क नजर आता है। इसे असम के तराई जगहों पर पैदा किया जा रहा है।

garlic rate : बड़े दाने का उठाया फायदा

सितंबर माह में कृषि उपज मंडी में बड़े दाने के लहसुन की खेप आई थी, जिससे यह लहसुन बाजार में पहुंच गया था। खाद्य विभाग ने कार्रवाई करते हुए इसकी जांच की थी। जांच में यह सामने आया कि असम के पहाड़ी क्षेत्र में ढालदार खेती में इसकी पैदावार ली है। इसे देश के विभिन्न हिस्सों में भेजा गया था। चाइना के बॉडर एरिए के पास इसकी उपज लेने का फायदा बिचौलियों ने उठाया है और इसे बड़े दाने का लहसुन बना दिया था। इससे मार्केट में इसके भाव तेज हो गए। उधर, पेस्ट बनाकर बेचने वाले भी सक्रिय हो गए थे।

garlic rate : ऐसे चल रहा लहसुन का रेट

मौजूदा हालात में लहसुन 300 रुपए फुटकर में विक्रय हो रहा है। इसे थोक में 250 रुपए किलो बेचा जा रहा है। यहीं लहसुन बिचौलियों के माध्यम से वेजीटेबल मर्चेंट को 200 रुपए मिल रहा है। जानकार कहते हैं कि यह लहसुन असम से सौ रुपए किलो दाम पर भेजा जा रहा है। मर्चेंट का कहना है कि हमें जिस रेट पर मिल रहा है, उसी के आधार पर खर्चे काटकर उसे बाजार में दिया जाता है।

garlic rate : कृषि उपज मंडी में संदिग्ध लहसुन पर कार्रवाई की थी। जांच की गई है, जिसमें लहसुन की पैदावार असम में ही होना सामने आई है।

  • पंकज श्रीवास्तव, खाद्य सुरक्षा अधिकारी
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