लूम संचालक कर रहे पहल : छोटे स्तर पर होगी शुरुआत
जबलपुर । गारमेंट इंडस्ट्री के लिए शहर में ही कपड़ा बनाने की योजना कुछ लूम संचालकों ने बनाई है। जल्द ही इसकी मशीन रद्दी चौकी के पास दि भारत पावरलूम वस्त्र प्रक्रिया विपणन सहकारी समिति के परिसर में लगेगी। इसका फायदा गारमेंट इकाइयों के संचालकों को होगा। साथ ही लूम संचालकों को नया उत्पाद और लोगों को रोजगार का अतिरिक्त विकल्प मिलेगा।
250 से अधिक पावरलूम
शहर में अभी 250 से अधिक पावरलूम हैं। इनमें मुख्यत: जबलपुरी साड़ी तैयार होती थी। 80 प्रतिशत लूम का यही मुख्य उत्पाद था। मांग में कमी और नागपुर क्षेत्र में ऐसी ही साड़ी बनने से शहर में इसका उत्पादन प्रभावित हुआ है। अब 50 प्रतिशत लूम पर ये तैयार होती हैं। इसके बाद लुंगी, मेडिकल बेड शीट, चादर, गमछा, बस्ते का कपड़ा और दरी का काम शुरू हुआ। लेकिन, समय के साथ इसमें बदलाव जरूरी हो गया है। इसलिए अब गारमेंट में सम्भावनाएं तलाशी जा रही हैं। शहर में रेडीमेड गारमेंट की 400 से अधिक इकाइयां हैं। इनमें बनने वाले सलवार सूट में जो कपड़ा इस्तेमाल किया जाता है, वह गुजरात व अन्य जगह का होता है। रोजाना इन इकाइयां में छह हजार मीटर कपड़े की कटिंग होती है। इसके लिए कपड़ा आने में देरी से लेकर उसमें जीएसटी भी वस्त्र निर्माताओं को चुकानी पड़ती है। यदि शहर में ही कुछ मात्रा में यह कपड़ा तैयार किया जाता है, तो न केवल गारमेंट संचालकों को फायदा होगा, बल्कि नए लोगों को रोजगार भी मिलेगा।
उत्पादन के साथ बाजार भी
जबलपुर में उत्पादन होता है, तो इसका बाजार यहां पहले से मौजूद है। इस बात को ध्यान में रखकर 200 सदस्यों वाली दि भारत पावरलूम वस्त्र प्रक्रिया विपणन सहकारी समिति की आमसभा में नई मशीन लगाने पर निर्णय हुआ। इसमें समिति के सदस्यों के अलावा अन्य लूम संचालकों की भागीदारी रहेगी। इसमें किसी प्रकार की शासकीय सहायता नहीं ली जाएगी। निजी भागीदारी से मशीन खरीदकर कपड़ा तैयार किया जाएगा। समिति के पास अभी एक एकड़ जगह रद्दी चौकी में है। यहीं पर लूम से जुड़ा शासन का सर्विस सेंटर है।
इन कपड़ों की है खपत
सलवार सूट में कई प्रकार के कपड़ों का उपयोग किया जाता है। इनमें टपेटा, मुडाल, लिजीबिजी और फरमाइस जैसे वस्त्र शामिल हैं। गुजरात से थान के रूप में यह कपड़ा आता है। इन्हीं में से कुछ कपडे़ आधुनिक मशीनों पर तैयार किए जाएंगे। प्रारंभ में उत्पादन क्षमता 100 मीटर प्रतिदिन तक रखने की योजना है। फिर मांग के अनुरूप इसे बढ़ाया जाएगा।
जबलपुर के पावरलूम उद्योग को जददोजहद करनी पड़ रही है। इसके लिए क्लस्टर का प्रस्ताव गति नहीं ले पाया। फिलहाल गारमेंट इंडस्ट्री की जरूरतों को ध्यान में रखकर नए कपडे़ के उत्पादन की योजना बनाई गई है। इसमें समिति सदस्य और लूम संचालक शामिल हो सकते हैं।
मो. अशफाक अहमद अंसारी, अध्यक्ष दि भारत पावरलूम वस्त्र प्रक्रिया विपणन सहकारी समिति
यह है स्थिति
शहर में 300 से अधिक पावरलूम का संचालन।
सूती वस्त्रों का उत्पादन, पांच राज्यों में सप्लाई।
दो हजार लोगों को मिला है प्रत्यक्ष रोजगार।
जिले में 400 गारमेंट इकाइयों का है संचालन।
रोजाना 5 हजार मीटर कपड़े की होती है कटिंग।