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इस व्रत से मिलता है मनपसंद वर , खुल जाते हैं भाग्य

- 20 जनवरी को है गौरी तृतीया

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narmada ghat

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जबलपुर. माघ मास की शुक्ल पक्ष की तृतीया का दिन सौभाग्य वृद्धिदायक माना जाता है। इस दिन गौरी तृतीया व्रत रखा जाता है। यह व्रत रखने से जहां विभिन्न कष्टों से मुक्ति मिलती है और सफलता का मार्ग प्रशस्त होता है वहीं सोए हुए भाग्य भी जाग जाते हैं। ज्योतिषाचार्य पंडित दीपक दीक्षित बताते हैं कि शक्तिरूपा पार्वती की कृपा प्राप्त करने के लिए यह उत्तम व्रत है। शादी के लिए अविवाहित कन्याएं इस व्रत को पूरी श्रद्धा से करें। पार्वती माता की प्रसन्नता से कुवारी कन्याओं को मनपसंद वर मिलते हैं। शहर के नर्मदा किनारे ग्वारीघाट, तिलवारा घाट आदि में नर्मदा स्नान कर शिव-पार्वती की पूजा करने से भी व्रत का पुण्य बढ़ जाता है।


ऐसे करें शिव-पार्वती की पूजा
सुबह स्नान आदि कर देवी पार्वती के साथ-साथ भगवान शिव का पूजन करना चाहिए। पंचगव्य तथा चंदन निर्मित जल से देवी सती और भगवान शिव की प्रतिमा को स्नान करवाना चाहिए। धूप, दीप, नैवेद्य तथा नाना प्रकार के फल अर्पित कर पूजा करनी चाहिए। इस दिन व्रत को संकल्प सहित प्रारंभ करना चाहिए। पूजन में श्रीगणेश पर जल, रोली, मौली, चंदन, सिंदूर, लौंग, पान, चावल, सुपारी, फूल, इलायची, बेलपत्र, फल मेवा और दक्षिणा चढ़ाते हैं। गौरी की प्रतिमा को जल, दूध, दही आदि से स्नान करा, वस्त्र आदि पहनाकर रोली, चंदन, सिंदूर, मेहंदी लगाते हैं। शिव-पार्वती की मूर्तियों का विधिवत पूजन करके गौरी तृतीया की कथा सुनी जाती है तथा गौरी माता को सुहाग की सामग्री अर्पण की जाती है। इस व्रत का जो स्त्री इस प्रकार उत्तम व्रत का अनुष्ठान करती है, उसकी कामनाएं पूर्ण होती हैं।


सती को मिले थे शिव-शंकर
पंडित जनार्दन शास्त्री बताते हैं कि शास्त्रों के अनुसार इस व्रत से सौभाग्य की प्राप्ति होती है। स्त्रियों को दांपत्य व संतान सुख की प्राप्ति होती है। व्रत की महिमा के संबंध में पुराणों में उल्लेख है कि दक्ष कन्या सती ने भगवान शिव को पाने हेतु जो जप-तप आदि किए, उन्हें उनका फल प्राप्त हुआ। शुक्लपक्ष की तृतीया तिथि को भगवान शिव के साथ सती विवाह हुआ। अत: माघ शुक्ल तृतीया के दिन उत्तम सौभाग्य प्राप्त करने के लिए यह व्रत किया जाता है। यह व्रत सभी मनोरथों को पूर्ण करने वाला है। यह व्रत स्त्रियों के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण होता है। सुहागन स्त्रियां पति की दीर्घायु और अखंड सौभाग्य की कामना के लिए इस दिन आस्था के साथ व्रत करती हैं। अविवाहित कन्याएं मनोवांछित व उत्तम वर की प्राप्ति हेतु यह व्रत करती हैं।