
gayab ho gaye talab jabalpur ki kahani
जबलपुर. शहर व शहर की सीमा से लगे 30 ताल-तलैया विलुप्त हो गए हैं। इन तालाबों में कई विशाल तालाब थे, जिन्हें भूमाफिया निगल गया या फिर प्रशासनिक अफसरों की करामात के चलते इनका अस्तित्व खत्म हो गया। इन एेतिहासिक धरोहरों को संभालने की नाकामी और जानबूझकर इनके विनाश में सहभागिता का खामियाजा आज पूरा शहर भुगत रहा है। इन बेशकीमती ताल-तलैया को सहेजकर रखा गया होता तो पानी का एेसा हाहाकार नहीं मचता और न ही शहर का भूजल स्तर गर्त में जाता।
news- गिरा भूजल स्तर, संभाली होतीं धरोहरें तो पानी के लिए एेसे नहीं तरसता शहर, दफन हो गए बेशकीमती 30 ताल-तलैया
जो हैं उन्हें बचा लो
तीस ताल-तलैया तो हमने खो दिए हैं, लेकिन वर्तमान में मौजूद तालाबों को ही बचा लिया गया तो आने वाली पीढ़ी हमें याद रखेगी। वर्तमान में अपना अस्तित्व बचाए रखने के लिए कई तालाब संघर्ष कर रहे हैं। इनमें कई बड़े तालाब भी हैं। इन्हें सहेजकर शहर के जलस्तर को बरकरार रखा जा सकता है। इमरती तालाब, रानीताल तालाब, महानद्दा तालाब, महाराजपुर तलैया, अमखेरा ताल, रिछाई तलैया, बिलपुरा तालाब, तिलहरी तालाब सहित कई तालाब सिमटते जा रहे हैं। इन तालाबों को संरक्षित किया जाना समय की दरकार भी है।
पानी पीते थे, बनता था खाना- शहर के जो तालाब आज गंदगी से बजबजा रहे हैं और जिनका पानी छूने लायक तक नहीं बचा है, उनका पानी एक जमाने में पीने के काम आता था। शहरवासी इन तालाबों पर ही निर्भर थे, जिनके पानी से घरों में खाना बनता था और निस्तार भी होता था। अब शहर का एक भी तालाब एेसा नहीं बचा है। गढ़ा के लोग इमरती तालाब, गुलौआ तालाब, सूपाताल के पानी का ही हर काम में उपयोग करते थे। रानीताल तालाब का पानी अपनी स्वच्छता के लिए जाना जाता था। हनुमानताल, महानद्दा, माढ़ोताल बढ़ी आबादी का गुजारा करता था।
ये ताल-तलैया विलुप्त
भंवरताल
माढ़ोताल
तिलक भूमि की तलैया
श्रीनाथ की तलैया
हाथीताल
बाबा की तलैया
जूड़ी तलैया
कदम भूमि की तलैया
चौकीताल
लक्ष्मीपुर तलैया
बेनीसिंह की तलैया
सूरज तालाब
हिनौता तालाब
बैतला तलैया
फूटाताल
गुरहा ताल
नौआ ताल
बनवारा ताल
कटरा ताल
तिरहुतिया तालाब
साईंताल
गणेश ताल
छोटी उखरी तलैया
भानतलैया
सेवाराम की तलैया
बाबाताल
उखरीताल
गुड़चरहाई की तलैया
कूडऩताल
फूलहाई की तलैया
Published on:
10 Jun 2018 12:24 pm

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