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जबलपुर. नर्मदा जल जबलपुर से दमोह के तेंदूखेड़ा तक पहुंच गया है। लम्हेटाघाट में ढाई सौ करोड़ से ज्यादा की लागत से बना अत्याधुनिक जल शोधन संयंत्र 7 नगरों की प्यास बुझाएगा।
जल संकट से मिलेगी निजात
नर्मदा की गोद में बसा भेड़ाघाट अंतरराष्ट्रीय पर्यटन स्थल होने के बावजूद स्थानीयजन बोरिंग का पानी पीते हैं। अब उन्हें लम्हेटाघाट प्लांट से नर्मदा जल मिलेगा। इसी तरह से गर्मी के दिनों में भू जल स्तर गिरने और हिरन नदी के सूखने से जल संकट का सामना करने वाले कटंगी, मझौली, सिहोरा इलाकों के लोगों को भरपूर पानी मिलेगा। वहीं पाटन और पनागर क्षेत्र में भी पानी की समस्या दूर होगी। मध्यप्रदेश अर्बन डेवलपमेंट कंपनी ने एशियन डेवलपमेंट विकास बैंक की मदद से प्लांट का निर्माण किया है। प्लांट को 30 साल की आबादी को जलपूर्ति के लक्ष्य को लेकर बनाया गया है। लम्हेटाघाट में बने जल शोधन संयंत्र से जलापूर्ति के लिए नेटवर्क तैयार करने रेलवे लाइन के नीचे से भी पानी की पाइप लाइन को बिछाया गया। इसके लिए सिहोरा और पाटन में ट्रीचिंग टेक्नीक का उपयोग किया गया।
यह है स्थिति
257 करोड़ निर्माण लागत 02 लाख 46 हजार नल कनेक्शन का लक्ष्य 159 किलोमीटर की राइजिंग लाइन 328 किलोमीटर की सप्लाई लाइन 30 की आबादी को लक्ष्य मानकर किया गया है प्लांट निर्माण
जानकारी के अनुसार प्लांट से भेड़ाघाट, पाटन, कटंगी, मझौली, पनागर, सिहोरा, तेंदूखेड़ा तक नर्मदा जल पहुंचाने बड़ा जलापूर्ति नेटवर्क तैयार किया गया है। इसमें तेरह पानी की टंकी शामिल हैं। इसके साथ ही राइजिंग और सप्लाई लाइन समेत कुल पौने पांच सौ किलोमीटर की पाइप लाइन बिछाई गई है।
लम्हेटाघाटघाट प्लांट से दमोह के तेंदूखेड़ा तक पानी पहुंच गया है। जल्दी जलापूर्ति शुरू हो जाएगी। अगले चार महीने में प्लांट से 7 नगरों के सभी लक्षित परिवारों को नल से नर्मदा जल मिलने लगे इसके लिए प्रयासरत हैं।
अभय जैन, प्रोजेक्ट प्रभारी, लम्हेटाघाट, जल शोधन संयंत्र
Published on:
26 Oct 2022 11:26 am
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