15 फ़रवरी 2026,

रविवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

girls fashion trend लंदन बैंकॉक की लड़कियों को खूब पसंद आ रही मप्र की जरदोजी

जबलपुर की हैंड एम्बरॉइडी के विदेशों में कद्रदान, 500 कारखाने परोस रहे अपनी कला, हुनर बना जीविकोपार्जन का सहारा

2 min read
Google source verification
girls fashion trend लंदन बैंकॉक की लड़कियों को खूब पसंद आ रही मप्र की जरदोजी

girls fashion trend लंदन बैंकॉक की लड़कियों को खूब पसंद आ रही मप्र की जरदोजी

जबलपुर। एशिया की नंबर वन सलवार सूट इंडस्ट्रीज की कला अब लंदन पहुंच गई है। 'अड्डा कढ़ाई' लोगों की पसंदीदा बनती जा रही है। विदेशों में बढ़ रहे शौकीनों की वजह से शहर के करीब २००० कारीगीरों को अपना हुनर देश के बाहर दिखाने का मौका मिल रहा है। हुनरमंद लोगों की यह कला अब जीविकोपार्जन का सहारा बन गई है। चुनिंदा जगह पर कारखानों में हुनरमंद जरदोजी से सलवार-सूट, लाचा, शेरवानी, जैकेट, कोट, कुर्ते आदि में नक्काशी करके अपनी प्रतिभा दिखा रहे हैं। विदेशों की पसंद बनी जरदोजी पर पत्रिका की पॉजीटिव रिपोर्ट...।

शहर के रद्दीचौकी, चारखम्भा, मदारटेकरी, मोहरिया, गोहलपुर, ठक्करग्राम, बहोराबाग, टेढ़ीनीम आदि जगह की तंग गलियों में भी जरदोजी के कारखाने हैं। इन कारखानों में सादे कपड़ों को बेशकीमती बनाया जा रहा है। यहां कपड़ों में चांद-सितारे और आकर्षक रंगीन धागों से नक्काशी की जाती है। नक्काशी के बाद तैयार माल शो-रूम तक पहुंचाया जाता है, जहां से ये महानगर होते हुए विदेशों तक पहुंच रहे हैं।

एशिया की नंबर वन मंडी
सलवार-सूट के मामले में जबलपुर एशिया की नंबर वन मंडी है। यहां सलवार-सूट बनाने के घर-घर कारखाने हैं। इन कारखानों में खरीद के लिए महानगरों से व्यापारी आ रहे हैं। सलवार-सूट इंडस्ट्रीज में अपनी धाक जमाते ही इसे अपग्रेड किया है और जरदोजी (हैंड एम्बरॉइडी) का भी काम शुरू किया है, जिसकी मांग को लेकर कारीगीरों ने जरदोजी वाले सूट तैयार करने शुरू किए। नक्काशी को देखते हुए शेरवानी, बैग आदि में भी इसका प्रयोग शुरू किया, जो काफी लोकप्रिय हुआ।

दो हजार से अधिक कारीगीर
जरदोजी के काम से जुड़े लोगों का कहना है कि शहर में दो हजार से अधिक कारीगीर हैं। इन कारीगीरों में करीब पच्चीस फीसदी महिलाएं भी हैं। इन कारीगीरों में ज्यादातर महिलाएं घर से ही कार्य कर रही हैं। पुरुष वर्ग हैंड एम्बरॉइडी यूनिट में जाकर कार्य कर रहे हैं, जिसे 'अड्डा कढ़ाईÓ के नाम से पुकारा जाता है।

एेसे की जाती है जरदोजी
लकड़ी का चौकारे फेम बनाया जाता है। इस फ्रेम में तगाई करने के लिए छोटे छिद्र बनाए जाते हैं। इन छिद्रों में धागे से कपड़े को कसकर बांध दिया जाता है। टाइट कपड़े पर डिजाइन उकेरी जाती है और उसके बाद उस डिजाइन में मनपसंद रंगीन और चमकदार धागों के साथ मोती, कटदाना, सितारे, चेन, गोल, नक्सी, स्टोन, क्रिस्टल आदि बुन दिए जाते हैं। इससे तैयार होने वाली डिजाइन में खूबसूरती बढ़ जाती है और कपड़ों की धुलाई के बाद भी ये नहीं निकलते हैं।

यहां हो रही सप्लाई
लंदन, दुबई, बैंकॉक, सिंगापुर, अरब देश

दस वर्ष से कार्य कर रहे हैं। हमारा यह पुस्तैनी कार्य है। हमारे घर में भी यही कार्य होता है।
- रफीक

बारह वर्ष से कार्य कर रहे हैं। हमारे भाई लोग भी यही कार्य करते हैं। आमदनी ठीकठाक हो
जाती है।
- गुलाम

पंद्रह वर्ष से यह कार्य कर रहे हैं। लेडीज कार्य कर रहे थे। अब जेन्टस वर्क में भी शेरवानी, जैकेट, कोट, कुर्ते आदि बना रहे हैं। हम हिन्दुस्तान के अलावा लंदन, सिंगापुर, बैंकॉक,
अरब देशों में यह माल सप्लाई किया जा रहा है।
- इफ्तकार अली, कारखाना मालिक

हैंड एम्ब्ररॉइडी प्रोडेक्ट के एक्सपोर्ट पर ध्यान दिया जा रहा है। हमारी कोशिश है कि इन सभी को एक छत के नीचे लाया जाए ताकि इनकी नक्काशी और कारीगीरों को बढ़ावा मिल सके। शहर में इंटीमेंशन सेंटर खोलने के प्रयास होंगे।
- हिमांशु खरे, वरिष्ठ उपाध्यक्ष, जबलपुर चेम्बर ऑफ कामर्स इंडस्ट्रीज