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धर्म-संस्कृति ज्ञान के लिए बच्चों को सनतान संस्कार दें

जबलपुर में बोले सुशील चंद्रास्वामी, कहा मंदिरों में जाना ही चाहिए    

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Construction of temple on Lord Rama's birthplace in Ayodhya

Construction of temple on Lord Rama's birthplace in Ayodhya

जबलपुर। समाज में अब तेजी से परिवर्तन आ रहा है और इसके सबसे ज्यादा दुष्परिणाम हिंदू धर्मालंबियों पर पड़ रहे हैं। पश्चिमी सभ्यता के वशीभूत होकर हमं बच्चों को अंगेजी माध्यम में शिक्षा दे रहे हैं। जिससे धर्म-संस्कृति का ज्ञान, सनातन संस्कार विलुप्त हो रहे हैं। इस संस्कृति को पुनरजीवित करने के लिए बच्चों को सनातन संस्कार की शिक्षा देना आवश्यक है। यह बात जबलपुर प्रवास के दौरान राइट टाउन जमना सभागृह में पत्रकारों से चर्चा करते हुए तांत्रिक स्व. चंद्रास्वामी के उत्तराधिकारी सुनील चंद्रास्वामी ने कहीं। वे यहां कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर हरे कृष्ण आश्रम भेड़ाघाट में होने वाली पंचकोशी परिक्रमा में सम्मिलित होने आए हैं।

उन्होंने कहा कि वामपंथी प्रचारकों ने हिंदू धर्म के साथ ही साधना को गलत तरीके से परिभाषित किया है। इसका असर यह हुआ कि हिंदू समाज परम्पराओं से दूर देवी देवताओं के मंदिर भी नहीं जाता। हिंदुओं में सामूहिक प्रार्थना का भी चलन नहीं है, जबकि अन्य धर्मों में अपने आराधना स्थलों में सामूहिक प्रार्थना होती है। हिंदू धर्म में तो सप्ताह के सात दिन देवी-देवताओं के माने गए हैं। आज आवश्यकता है कि जो हजारों मंदिर पूजन अर्चन से दूर हैं,वहां पूजा-अर्चना चालू की जाए। इस अवसर पर किन्नर महामंडलेश्वर हिमांगी सखी ने कहा कि मां नर्मदा के दर्शन से ही जीव के कई जन्मों के पाप कट जाते हैं। इस अवसर पर शरद अग्रवाल, डॉ. सुधीर अग्रवाल, डॉ.शिव शंकर पटेल, आचार्य मनमोहन दुबे उपस्थित थे।