
सावन के महीने के अवसर पर शिवालयों में पूजन का दौर जारी है। देश के हर शिवालयों में शिव भक्तों का मेला लगा हुआ है, क्योंकि यह शिव का सावन है और सावन माह में भगवान शिव अपने भक्तों की हर मनोकामनाएं पूर्ण करते है। आज हम आपको संस्कारधानी जबलपुर के एक ऐसे प्राचीन शिव मंदिर से परिचय करते हैं जो नर्मदा नदी पर बने बरगी बांध के सामने ऊंची पहाड़ी पर स्थित हैं, जो विदेशों में भी नन्दकेश्वर महादेव के नाम से जाना जाता है।
बरगी बांध के सामने बना मंदिर
संस्कारधानी जबलपुर से 40 किलोमीटर दूर है नर्मदा नदी पर बना बरगी बांध। इस बांध का निर्माण कार्य 1974 को शुरू किया गया था परंतु जो डूब का क्षेत्र था उस क्षेत्र में एक प्राचीन नन्दकेश्वर महादेव का शिव मंदिर भी आ रहा था। जिसे शासन द्वारा डूब क्षेत्र से हटा कर बरगी बांध के सामने स्थित एक ऊंची पहाड़ी पर पूरे विधि विधान से पूजा कर स्थापित कर दिया गया।
लोगों द्वारा ऐसा कहा जाता है, ये शिवलिंग नर्मदा नदी में नंदी की तपस्या के बाद खुद ही प्रकट हुए थे और जब गंगा और नर्मदा ने भगवान शिव से प्रार्थना की कि आप नर्मदा तट पर ही स्थापित हो जाइए तब भगवान शिव ने गंगा और नर्मदा की प्रार्थना स्वीकार कर नर्मदा तट के ग्राम भिड़की में स्थित नंदकेश्वर घाट पर ही स्थापित हो गए थे। जब बरगी बांध में पानी भरना शुरू हुआ तब नंदकेश्वर घाट से शिवजी की पिंडी लाकर बरगी बांध के सामने वाली पहाड़ी पर संगमरमर से बने भव्य मंदिर में स्थापित कर दिया गया।
मनोकामना पूर्ति के लिए विख्यात
नन्दकेश्वर महादेव के धाम दूर दूर से आने वाले भक्तों की नन्द केश्वर महादेव के मंदिर से गहरी आस्था जुड़ी हुई है। इस शिव मंदिर में आने वाले भक्तों की हर मनोकामना नन्दकेश्वर पूरी करते हैं। इतना ही नहीं स्थानीय लोगों का मानना है कि नन्दकेश्वर महादेव के कारण कभी भी बरगी बांध में कोई भी बड़ा हादसा नहीं हुआ है।
बरगी बांध के आसपास रहने वाले शिव भक्तों का भी कहना है कि नन्द केश्वर महादेव ही हमारे रक्षक हैं और उनकी कृपा दृष्टि से बांध के साथ उसके आसपास रहने वालों पर हमेशा से ही बनी रहती है।
Published on:
05 Aug 2022 02:14 pm
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