
Good news, monsoon rain is coming soon
जबलपुर। एमपी के वाशिंदों के लिए यह खबर बेहद राहत भरी है। दरअसल मानसून ने रविवार को मध्य प्रदेश की सीमा में दस्तक दे दी है। इसके प्रभाव से ही रविवार को जबलपुर और आसपास के क्षेत्रों में घने बादल छाए रहे। हालांकि प्री मानसून बारिश से राहत मिलने की उम्मीद अधूरी रह गई। मौसम विज्ञानियों के अनुसार अरब सागर के मानसून ने खंडवा, बुरहानपुर और अलीराजपुर जिलों में प्रवेश किया है। अगले 48 घंटे में इसके जबलपुर पहुंचने का पूर्वानुमान है। इसका असर छत्तीसगढ़ के साथ पूरे मध्य प्रदेश में रहेगा। जबकि, उप्र, बिहार और झारखंड के मानसून का असर और कम दबाव का चक्रवात बनने से बंगाल की खाड़ी वाले मानसून को पूर्वी मप्र की ओर बढऩे की प्रबल संभावना है। दोनों ओर का मानसून जबलपुर की ओर बढ़ रहा है।
आ रहे दो मॉनसून
मौसम विभाग के वैज्ञानिक सहायक देवेंद्र तिवारी ने बताया कि दोनों मानसून को जबलपुर में पहुंचने की संभावना है। 26 जून से अच्छी बारिश का पूवानुमान है। शहर के एक दिन पहले आधा इंच बारिश के कारण वातावरण में नमी बढ़ गई। तापमान में गिरावट से गर्मी से राहत मिली जबकि, उमस के कारण लोगों को परेशानी महसूस हुई। दिन दक्षिणी हवा की औसत रफ्तार 4 किमी प्रति घंटा रही। दक्षिणी हवा के माध्यम से आ रही नमी के कारण बादल बन रहे हैं। ये बादल जमकर बरस सकते हैं।
कम हुआ तापमान
मौसम विज्ञान केन्द्र ने पूर्वी मप्र के जबलपुर, के बालाघाट, उमरिया, सिवनी, मंडला डिंडारी क्षेत्र में प्री मानसून बारिश का पूर्वानुमान व्यक्त किया है। वहीं बादलों की वजह से तापमान में कुछ गिरावट आई है। रविवार को अधिकतम तापमान सामान्य के स्तर पर 35.8 और न्यूनतम तापमान भी सामान्य 24.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। सुबह की आद्र्रता 79 और शाम की आद्र्रता 51 प्रतिशत रही। बादलों की मौजूदगी के बीच उमस होती रही।
खरीफ फसलों की तैयारी
जवाहर लाल नेहरु कृषि विश्वविद्यालय के मौसम वैज्ञानिक डॉ. मनीष भान ने बताया कि कृषि के लिहाज से मानसून देर नहीं हुआ है। किसानों को चाहिए कि खरीफ सीजन में धान और सोयाबीन के फसल की तैयारी कर लें। धान की नर्सरी तैयार कर लें। जुलाई के प्रथम सप्ताह में अच्छी बारिश नहीं होने पर फसल पर बुरा असर पड़ता है। मानसून सक्रिय हुआ है, प्री मानसून और मानसून दोनों प्रकार की बारिश की संभावना है।
नमी आते ही शुरू करें काम
कृषि वैज्ञानिक डॉ. आरएस शर्मा का कहना है कि बारिश के बाद मिट्टी नम हो जाएगी। जैसे ही पर्याप्त नमी होगी, वैसे ही धान का रोपा लगाना उचित होगा। सोयाबीन की बुवाई तब करनी चाहिए, जब जमीन में चार इंच नमी हो। मानूसन की बारिश के बाद भी पर्याप्त नमी आएगी। पहले से तैयारी करने वाले किसान समय पर बुवाई व रोपाई करा सकेंंगे। वहीं गन्ने की सिंचाई कर उन्हें आपस में बांध देने की आवश्यकता है ताकि गिरकर फसल बर्बाद न हो।
Published on:
24 Jun 2018 09:40 pm
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